गर्भावस्था का साइलेंट किलर है प्री-एक्लेंपसिया, समय पर जांच से बच सकती है दो जिंदगियां

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गर्भावस्था का साइलेंट किलर है प्री-एक्लेंपसिया, समय पर जांच से बच सकती है दो जिंदगियां


किशनगंज, 02 जून (हि.स.)। गर्भावस्था के दौरान होने वाली गंभीर जटिलताओं में शामिल प्री-एक्लेंपसिया को स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने साइलेंट किलर बताया है।

चिकित्सकों का कहना है कि समय पर पहचान और उपचार नहीं मिलने पर यह बीमारी गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इसे मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में तीसरे स्थान पर माना जाता है।

ऐसे में नियमित प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) के माध्यम से इसकी समय रहते पहचान कर गंभीर जोखिमों को टाला जा सकता है। मंगलवार को सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि प्री-एक्लेंपसिया ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्भवती महिला का रक्तचाप असामान्य रूप से बढ़ जाता है और शरीर के विभिन्न अंग प्रभावित होने लगते हैं।

उन्होंने कहा कि अत्यधिक रक्तस्राव और संक्रमण के बाद मातृ मृत्यु का यह तीसरा बड़ा कारण माना जाता है। हालांकि नियमित जांच और उचित उपचार से अधिकांश मामलों में गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है।

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अनवर हुसैन ने बताया कि प्री-एक्लेंपसिया की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कई महिलाओं में इसकी जानकारी नियमित जांच के दौरान रक्तचाप बढ़ने पर ही मिलती है। इसी वजह से इसे साइलेंट किलर कहा जाता है। उन्होंने गर्भवती महिलाओं को कम से कम चार प्रसव पूर्व जांच कराने की सलाह दी। महिला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रिजवाना तबस्सुम ने बताया कि गर्भावस्था के 20 सप्ताह के बाद उच्च रक्तचाप और पेशाब में प्रोटीन की मौजूदगी प्री-एक्लेंपसिया का संकेत हो सकती है। इसके अलावा हाथ-पैर और चेहरे पर अत्यधिक सूजन, लगातार सिरदर्द, आंखों के सामने धुंधलापन, चमक दिखाई देना, बेचैनी और पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द जैसे लक्षण भी इसके संकेत हैं।

उन्होंने बताया कि समय पर इलाज नहीं होने पर यह बीमारी एक्लेंपसिया में बदल सकती है, जिससे दौरे पड़ने, किडनी, लीवर और मस्तिष्क प्रभावित होने तथा कोमा तक की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। सदर अस्पताल में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी, आवश्यक जांच, भर्ती और सुरक्षित प्रसव की सुविधा उपलब्ध है। चिकित्सकों ने संतुलित आहार, पर्याप्त आराम और नियमित स्वास्थ्य जांच को इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय बताया है।

हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह

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