छपरा में जिला उर्दू भाषा कोषांग के द्वारा काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन
सारण, 08 जुलाई (हि.स.)। जिला उर्दू भाषा कोषांग के तत्वाधान में समाहरणालय परिसर में एक शाम बशीर बद्र के नाम साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कोषांग के प्रभारी पदाधिकारी सह उप निर्वाचन पदाधिकारी जावेद एकबाल ने कहा कि शायर बशीर बद्र की शायरी उर्दू साहित्य की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने अपनी सरल और दिल को छू लेने वाली गज़लों के माध्यम से प्रेम, इंसानियत, सौहार्द और समकालीन संवेदनाओं को खूबसूरती से अभिव्यक्त किया है।
जिला उर्दू भाषा कोषांग पदाधिकारी जावेद एकबाल ने नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने पर बल देते हुए कहा कि ऐसी गोष्ठियाँ युवाओं में भाषा के प्रति प्रेम और साहित्यिक चेतना विकसित करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने उर्दू को गंगा-जमुनी तहज़ीब की सुंदर प्रतिनिधि बताते हुए इसकी उन्नति को सबकी साझा जिम्मेदारी बताया।
कार्यक्रम में मेहदी शाॅ ने बशीर बद्र के अनूठे अंदाज़ और आवाज़ में उनकी रचनाएं पढ़ीं, जबकि कृष्ण मेनन ने अपनी मधुर आवाज़ में गज़ल प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर आयोजित काव्य गोष्ठी में ज़िले के प्रमुख साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। डॉ. मुअज्ज़म अज़्म ने जब दुश्मनों पर डाली नजर. और दक्ष निरंजन शंभू ने हमें दादी का वह खाना खिलाना याद आता है... जैसे खूबसूरत दोहा पढ़कर खूब वाहवाही बटोरी।
इसके अलावा प्रो. मजहर किबरिया, मोईज बहमन बरवी, प्रो. शकील अनवर और प्रो. शमीम परवेज़ ने भी अपनी शायरी से उक्त पल को यादगार बनाया। मौके पर प्रो अलाउद्दीन ख़ान, प्रो देवेंद्र सिंह, डॉ अब्दुस्समद भयंकर सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय कुमार

