पिपरा में वार रूम कर्मी की नियुक्ति 10 दिन में रद्द, बीडीओ के फैसले पर उठे सवाल
सुपौल, 13 जुलाई (हि.स.)। जिले के पिपरा प्रखंड में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत वार रूम कर्मी की बहाली को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नियुक्ति पत्र मिलने और कार्यभार संभालने के महज 10 दिन बाद ही चयनित अभ्यर्थी की नियुक्ति रद्द कर दी गई।
इस फैसले के बाद प्रखंड प्रशासन की कार्यप्रणाली और बहाली प्रक्रिया को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।जानकारी के अनुसार, बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (बीआरएलपीएस) और उप विकास आयुक्त, सुपौल के निर्देश पर प्रखंड स्वच्छता कार्यालय में वार रूम कर्मी के एक पद के लिए 24 जून से 29 जून 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए गए थे। आवेदनों की जांच के बाद कार्यालय के ज्ञापांक-821, दिनांक 1 जुलाई 2026 के तहत दीना पट्टी पंचायत निवासी संतोष कुमार पासवान का चयन किया गया। प्रखंड विकास पदाधिकारी अमरेन्द्र पंडित ने उन्हें नियुक्ति पत्र जारी किया और उन्होंने उसी दिन से कार्यालय में योगदान देकर कार्य शुरू कर दिया।
हालांकि, 11 जुलाई 2026 को कार्यालय के ज्ञापांक-891 के माध्यम से पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को निरस्त करते हुए संतोष कुमार पासवान की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया गया। आदेश में कहा गया कि बहाली प्रक्रिया नियमानुसार नहीं अपनाई गई थी, इसलिए इसे रद्द करते हुए नए सिरे से आवेदन लेकर भर्ती की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।सेवा से हटाए गए संतोष कुमार पासवान ने प्रशासन के फैसले को मनमाना बताते हुए कहा कि उन्हें विधिवत नियुक्ति पत्र देकर कार्यालय में योगदान कराया गया था और वे नियमित रूप से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। उनका आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना या स्पष्टीकरण का अवसर दिए उनकी सेवा समाप्त कर दी गई, जो उनके साथ अन्याय है।वहीं, प्रखंड विकास पदाधिकारी अमरेन्द्र पंडित ने कहा कि बहाली की नियमावली की पूरी जानकारी नहीं होने के कारण प्रक्रिया में त्रुटि रह गई थी। इसी वजह से नियुक्ति रद्द की गई है। उन्होंने बताया कि अब संबंधित पद पर सभी नियमों का पालन करते हुए दोबारा बहाली की जाएगी।इस पूरे मामले ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया में कोई कमी थी तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की बनती है, न कि चयनित अभ्यर्थी की। जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने तथा भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

