उपस्वास्थ्य केंद्रों में सरकारी संसाधन धूल फांक रहे, मरीजों को नहीं मिल रही सुविधा

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उपस्वास्थ्य केंद्रों में सरकारी संसाधन धूल फांक रहे, मरीजों को नहीं मिल रही सुविधा


मधेपुरा, 24 जून (हि.स.)। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पंचायत स्तर पर स्थापित उपस्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जिले के घैलाढ़ प्रखंड अंतर्गत भान टेकठी पंचायत एवं सदर प्रखंड के मिठाही पंचायत स्थित उपस्वास्थ्य केंद्रों में मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव देखने को मिल रहा है। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है।

बिहार सरकार एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (उपस्वास्थ्य केंद्र) में एक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ), दो एएनएम एवं एक पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता के माध्यम से ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इन केंद्रों पर सामान्य बीमारियों का उपचार, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवा, टीकाकरण, गैर संचारी रोगों की जांच एवं अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि उपस्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्यकर्मी तैनात रहने के बावजूद मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलती है। घैलाढ़ प्रखंड के भान टेकती उपस्वास्थ्य केंद्र में बुधवार को सुबह 10:30 बजे तक कोई भी स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं थे, जबकि केंद्र में पदस्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) एवं एएनएम दोनों केंद्र परिसर के ऊपरी हिस्से में ही निवास करते हैं। लगभग साढ़े 10 बजे के बाद एएनएम अमला कुमारी अस्पताल पहुंची। इसके अलावे सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी सहित कोई भी स्वास्थ्य कर्मी अस्पताल में मौजूद नहीं थे। वहीं मिठाई उपस्वास्थ्य केन्द्र में केवल सीएचओ सोनम कुमारी मौजूद थी इसके अलावे कोई नहीं स्वास्थ्य कर्मी मौजूद नहीं थे।

स्थानीय निवासी अशोक कुमार ने बताया कि उपस्वास्थ्य केंद्र में केवल दवा वितरण का कार्य किया जाता है। इसके अलावा मरीजों को अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। उन्होंने केंद्र पर सभी प्रकार की मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। वहीं उत्तमलाल यादव ने बताया कि केंद्र पर बिना किसी जांच के ही मरीजों को दवाइयां दे दी जाती हैं। यहां जांच की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि उपस्वास्थ्य केंद्रों में साफ-सफाई की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। प्रसव कक्ष में महंगे चिकित्सीय उपकरण और अन्य संसाधन उपयोग के अभाव में धूल फांक रहे हैं। वहीं दवाइयों को भी व्यवस्थित ढंग से नहीं रखा जाता, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल रही है।

इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार ने बताया कि उपस्वास्थ्य केंद्रों पर सीएचओ एवं एएनएम के माध्यम से सभी प्रकार के स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ स्थानों पर कमियां पाई गई हैं, जिन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। सिविल सर्जन ने कहा कि डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के कारण कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, फिर भी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों से दोनों उपस्वास्थ्य केंद्रों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने तथा नियमित स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित कराने की मांग की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / Prashant Kumar

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