लनामिवि में फणीश्वरनाथ रेणु जयंती पर संगोष्ठी आयोजित

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लनामिवि में फणीश्वरनाथ रेणु जयंती पर संगोष्ठी आयोजित


दरभंगा, 05 मार्च (हि.स.)। फणीश्वरनाथ रेणु की जयंती के अवसर पर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के तत्वावधान में ‘रेणु साहित्य में ग्रामीण संस्कृति’ विषयक आभासी संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लगभग सौ प्रतिभागियों ने भाग लिया। संचालन शोधार्थी समीर ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन शोधार्थी दुर्गानंद ठाकुर ने किया।

अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. उमेश कुमार ने कहा कि रेणु ग्रामीण संस्कृति के सबसे बड़े संवाहक रहे हैं और उनका साहित्य लोकजीवन का जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जब भी ग्रामीण संस्कृति के संदर्भों की तलाश होगी, तब अनिवार्य रूप से रेणु के साहित्य की ओर देखना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि रेणु ने ग्रामीण जीवन को बिना किसी कृत्रिम रोमांटिकता के यथार्थ रूप में प्रस्तुत किया है। उदाहरण स्वरूप उनके प्रसिद्ध उपन्यास परती परिकथा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें कोसी नदी और बाढ़ की त्रासदी के बीच मानवीय जिजीविषा का सशक्त चित्रण मिलता है।

कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद सुमन ने कहा कि रेणु का साहित्य ग्रामीण संस्कृति की धड़कन है और उनकी आंचलिकता में लोकजीवन की गहरी संवेदना समाहित है। वहीं विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. मंजरी खरे ने कहा कि रेणु ने आंचलिकता के माध्यम से वैश्विकता को स्पर्श किया है।

संगोष्ठी में विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक एवं शोधार्थियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में शोधार्थी खुशबू कुमारी, सूफिया खातून, निशा कुमारी, रूपक कुमार, मलय नीरव, बबीता कुमारी, स्नेहा, विद्यासागर ठाकुर, दर्शन, अंशु कुमारी, कंचन रजक, जय प्रकाश, रोहित कुमार पटेल, अमित कुमार, संध्या राय, अपर्णा कुमारी, मालविका, बेबी कुमारी, रूबी कुमारी, धीरज कुमार, मिल्टन, स्नेहा एवं मोहक सहित अन्य प्रतिभागी शामिल रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Krishna Mohan Mishra

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