भागलपुर में झमाझम बारिश से धान की फसल को मिला जीवनदान, 92% रोपनी पूरी
भागलपुर, 03 सितंबर (हि.स.)।
जिले में बीते कुछ दिनों से हो रही लगातार मानसूनी बारिश ने सूखे की मार झेल रहे अन्नदाताओं को बड़ी राहत दी है।
अगस्त के शुरुआती हफ्तों में कम बारिश के कारण जो धान के पौधे खेतों में मुरझाने लगे थे, वे अब इस बारिश से लहलहा उठे हैं। बारिश के पानी से खेतों में पर्याप्त नमी लौट आई है, जिससे पौधों के विकास को जबरदस्त बूस्ट मिला है।
जिला कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रतिकूल मौसम के बावजूद भागलपुर जिले में धान की रोपनी का 92 फीसदी लक्ष्य पूरा हो चुका है। इससे पहले अगस्त के शुरुआती हफ्ते तक केवल 78% (लगभग 44,306 हेक्टेयर) ही बुआई हो सकी थी। हालिया बारिश ने पिछड़ रही रोपनी की रफ्तार को तेज किया और अब जिला शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के बेहद करीब है। हालांकि, नाथनगर जैसे कुछ निचले गंगा तटीय इलाकों में बाढ़ और जलजमाव के कारण आंशिक रूप से फसलों को नुकसान की भी खबर है।
उल्लेखनीय है कि सूखे खेतों को पर्याप्त पानी मिलने से पौधों की जड़ें मजबूत हो रही हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश की तेज बौछारों से पौधों पर लगने वाले शुरुआती कीड़े खुद-ब-खुद धुल कर बह गए हैं। डीजल और पंपिंग सेट के सहारे सिंचाई कर रहे किसानों की जेब पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हुआ है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के वैज्ञानिकों ने किसानों को आगामी दिनों के लिए कई सुझाव दिए हैं।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि खेतों में जरूरत से ज्यादा पानी जमा न होने दें। यदि धान की फसल पूरी तरह पानी में डूब रही हो, तो मेढ़ों को काटकर अतिरिक्त पानी निकाल दें। यदि मिट्टी में नमी अच्छी है, तो कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर ही नाइट्रोजन (यूरिया) की टॉप-ड्रेसिंग करें। अत्यधिक जलजमाव की स्थिति में खाद डालने से बचें। इस मौसम में 'खैरा रोग' और 'तना छेदक' कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है। यदि पत्तियों का रंग पीला या भूरा दिखे, तो तुरंत नजदीकी कृषि समन्वयक से संपर्क कर अनुशंसित कीटनाशक या जिंक सल्फेट का छिड़काव करें। वहीं भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में अगले 48 से 72 घंटों तक मानसून सक्रिय रहेगा। मौसम विभाग ने भागलपुर सहित बिहार के कई जिलों के लिए भारी बारिश और वज्रपात का अलर्ट जारी किया है।
आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे और रुक-रुक कर मध्यम से भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खराब मौसम या बिजली कड़कने के दौरान खुले खेतों में जाने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर शरण लें।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

