नयी सहकारिता नीति के क्रियान्वयन से बिहार मे  सभी वर्गों एवं क्षेत्रों का होगा संतुलित विकास: राम कृपाल यादव

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बिहार राज्य सहकारिता नीति, 2026 के क्रियान्वयन एवं सहकारी समितियों के संचालन के लिए प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन

पटना, 21 अगस्त (हि.स.)। सहकारिता विभाग के मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि बिहार में नयी सहकारिता नीति 30 जुलाई 2026 से प्रभावी है। इसके क्रियान्वयन से राज्य में सहकारिता आंदोलन को नयी गति मिलेगी तथा सहकारी समितियों के माध्यम से राज्य के सभी वर्गों एवं क्षेत्रों का संतुलित विकास संभव होगा। मंत्री रामकृपाल यादव शुक्रवार काे पटना के दीप नारायण सिंह क्षेत्रीय सहकारी प्रबंध संस्थान में आयाेजित कार्यशाला काे संबाेधित कर रहे थे।

कार्यशाला का शुभारंभ सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह एवं सहयोग समितियां के निबंधक रजनीश कुमार सिंह, सहयोग समितियाँ के अपर निबंधक विकास कुमार बरियार सहित अन्य वरीय पदाधिकारियों ने दीप प्रज्जवलन कर किया।

क्षेत्रीय पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह ने सहकारी समितियों में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में सहकारिता के क्षेत्र में काफी कार्य किए जा रहे हैं। सहकारिता के माध्यम से आम लोगों के जीवन में समृद्धि और खुशहाली लाने का प्रयास किया जा रहा है। बिहार में पहली बार राज्य सहकारिता नीति, 2026 तैयार कर लागू की गयी है। इसके सफल क्रियान्वयन में क्षेत्रीय पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

कार्यक्रम में निबंधक रजनीश कुमार सिंह ने कहा कि नई सहकारिता नीति के तहत समितियों को अधिप्राप्ति से आगे निकलकर काम करना है, ताकि राज्य में सहकारिता क्षेत्र का विकास हो। उन्होंने क्षेत्रीय पदाधिकारियों को बिहार सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1935 एवं नियमावली में वर्णित प्रावधानों के आलोक में पारदर्शी तरीके से कार्य करने का निदेश दिया।

बिहार राज्य सहकारिता नीति, 2026 के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए अपर निबंधक, सहयोग समितियाँ विकास कुमार बरियार ने कहा कि विकसित राज्य की अवधारणा में सहकारिता की बहुत बड़ी भूमिका है। यह नीति ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, रोजगार सृजन, समावेशी विकास और आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस नीति से महिलाओं, युवाओं और वंचित वर्गों को जोड़ने का काम किया जाएगा। साथ ही, पर्यटन, डेयरी और हरित ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में सहकारी इकाइयों की स्थापना से बिहार की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को नई दिशा मिलेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / चंदा कुमारी

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