जैविक खेती से बदल रही जीविका दीदियों की जिंदगी
सहरसा,29 मई (हि.स.)। जिला परियोजना प्रबंधक श्लोक कुमार के नेतृत्व में जीविका द्वारा ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रभावी पहल की जा रही है।
इसी कड़ी में सोनबरसा प्रखंड की जीविका दीदियाँ जैविक खेती के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण की नई कहानी लिख रही है।वर्तमान में प्रखंड के 5 क्लस्टरों से कुल 912 जीविका दीदियाँ जुड़ी हुई हैं, जो लगभग 385.87 हेक्टेयर भूमि में विभिन्न फसलों की खेती कर रही हैं। इन क्लस्टरों में गेहूं, मखाना, सब्जी, गृह पोषण वाटिका, मूंग एवं मक्का की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है।
इससे खेती की लागत में कमी आने के साथ-साथ रसायन मुक्त उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है।जीविका के माध्यम से किसानों का पीजीएस इंडिया के तहत पंजीकरण कराया गया है। अगले वर्ष ये किसान पूरी तरह से प्रमाणित ऑर्गेनिक किसान बन जाएंगे, जिससे उनके उत्पादों को बेहतर बाजार एवं उचित मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।
प्राकृतिक खेती को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से सोनबरसा प्रखंड में जल्द ही बायो-रिसोर्स सेंटर बीआरसी की स्थापना की जाएगी।यह केंद्र स्थानीय सीएलएफ के स्वामित्व में संचालित होगा तथा समुदाय आधारित उद्यमियों एवं कृषि उद्यमियों द्वारा इसका प्रबंधन किया जाएगा। बायो-रिसोर्स सेंटर किसानों के लिए जैविक एवं प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले विभिन्न जैविक इनपुट के निर्माण,भंडारण,पैकेजिंग एवं वितरण का प्रमुख केंद्र होगा।
यहां मांग के अनुसार जैविक घोल तैयार किए जाएंगे तथा उत्पादन एवं स्टॉक रजिस्टर का संधारण किया जाएगा । उत्पादों की 1 लीटर, 2 लीटर एवं 5 लीटर पैकिंग की जाएगी तथा सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था भी होगी। इसके साथ ही कृषि मेलों, किसान बैठकों, व्हाट्सएप एवं डिजिटल प्रचार माध्यमों से इन उत्पादों का प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
बीआरसी के माध्यम से किसानों को स्थानीय स्तर पर जैविक इनपुट उपलब्ध होंगे, रासायनिक खाद पर खर्च कम होगा, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार आएगा तथा किसानों की आय में वृद्धि होगी। साथ ही ग्रामीण युवाओं को रोजगार एवं सामुदायिक उद्यमिता के अवसर भी प्राप्त होंगे।
इसके अतिरिक्त जिले में ऑर्गेनिक रिटेल आउटलेट स्थापित करने की भी तैयारी की जा रही है। इस विक्रय केंद्र के माध्यम से जैविक एवं रसायन मुक्त कृषि उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाए जाएंगे। यहां ताजी सब्जियां, दालें, मसाले, जैविक गुड़, अचार एवं अन्य वैल्यू एडेड उत्पाद उपलब्ध होंगे।
इस पहल से लगभग 200 से 240 किसानों को बाजार से जोड़ने तथा 500 से अधिक परिवारों को रसायन मुक्त उत्पाद उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।यह पहल महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार सृजन एवं टिकाऊ कृषि प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी ।
हिन्दुस्थान समाचार / अजय कुमार

