उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

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उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन


पटना, 13 जनवरी (हि.स.)। भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अंतर्गत उपभोक्ता कार्य विभाग द्वारा “पूर्वी राज्यों में उपभोक्ता संरक्षण पर एक दिवसीय कार्यशाला” का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला होटल ताज सिटी सेंटर, पटना में आयोजित हुई, जिसका उद्देश्य पूर्वी राज्यों में उपभोक्ता संरक्षण तंत्र को सुदृढ़ करना और उपभोक्ता अधिकारों को लेकर जागरूकता व प्रभावी क्रियान्वयन पर विचार-विमर्श करना था।

बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, भारत सरकार के उपभोक्ता कार्य विभाग की सचिव निधि खरे, अपर सचिव अनुपम मिश्रा और बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह ने कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।

प्रत्यय अमृत ने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह की कार्यशालाओं का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो भी योजनाएं बनाई जाएं, वे उपभोक्ता की सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार की जाएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि सभी निर्देशों और नीतियों का केंद्र एक आम आदमी होता है। आमतौर पर सरकारी अधिकारी आम आदमी को एक लाभान्वित व्यक्ति के रूप में देखते हैं, यानी वह व्यक्ति जो कल्याणकारी सेवाओं का प्राप्त कर्ता है। इस मॉडल के तहत योजना बनाई जाती है, राशि जारी की जाती है, योजना को लागू किया जाता है और उसका उद्घाटन किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल आवश्यक है, लेकिन अब यह अधूरा प्रतीत होता है।

उन्होंने कहा कि समय आ गया है जब सरकार को नागरिकों को केवल सेवाओं के लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के रूप में देखना चाहिए, जो स्पष्ट जानकारी, निष्पक्ष व्यवहार, समयबद्ध समाधान और जवाबदेह परिणाम के हकदार हैं। उनके अनुसार ये चारों बिंदु अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि जब कोई व्यक्ति कोई सामान या सेवा खरीदता है, तो उसकी अपेक्षाएं सरल और तात्कालिक होती हैं। वह चाहता है कि उत्पाद या सेवा सही ढंग से काम करे, सुरक्षित हो और किफायती हो। साथ ही, यदि कोई समस्या उत्पन्न होती है तो उसके समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने ई-जागृति प्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से 45 करोड़ रुपये का रिफंड जनरेट होना एक बड़ी उपलब्धि है।

मुख्य सचिव ने कहा कि यही उपभोक्ता शासन से अपेक्षित है और यही वह क्षेत्र है जहां प्रणाली को परिणाम देना चाहिए। किसी भी ऐप या प्रणाली के डिजाइन में आम आदमी को केंद्र में रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज का यह कार्यशाला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके केंद्र में वही उपभोक्ता है, जिस पर हमें अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

निधि खरे, सचिव, उपभोक्ता कार्य विभाग, भारत सरकार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि उपभोक्ता संरक्षण एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, जो हम सभी के ऊपर है। उन्होंने कहा कि यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम अपने नागरिकों और उपभोक्ताओं के अधिकारों की प्रभावी रूप से रक्षा करें।

उन्होंने बताया कि ई-जागृति को एक मॉडल के रूप में अपनाते हुए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन) ‘1915’ का गठन किया गया है। इसके साथ ही आईआईटी कानपुर के सहयोग से एनसीएच 2.0 के अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स का उपयोग किया जा रहा है।

श्रीमती खरे ने कहा कि यह जानकर सभी को आश्चर्य होगा कि मात्र आठ महीनों की अवधि, यानी मई 2025 से दिसंबर 2025 के बीच, उपभोक्ताओं को 45 करोड़ रुपये का रिफंड दिलाया गया है। यह उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा और प्रभावी उपभोक्ता शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुरभित दत्त

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