सारण के पुरातात्विक स्थल चिरांद पर एकदिवसीय संगोष्ठी जेपीयू में कल

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छपरा, 16 जनवरी (हि.स.)। जिले के पुरातात्विक स्थलों में शामिल चिरांद के विविध पक्षों पर अकादमिक मंथन के लिए जयप्रकाश विश्वविद्यालय छपरा द्वारा एक राज्यस्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। 17 जनवरी को आयोजित होने वाली इस संगोष्ठी का विषय 'चिरांद पुरातात्त्विक साक्ष्य, लोकस्मृति और सभ्यतागत निरंतरता का विमर्श' रखा गया है।

यह आयोजन जेपी विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग, इतिहास संकलन समिति, प्रज्ञा प्रवाह की इकाई ‘चिति’ एवं चिरांद विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न होगा। संगोष्ठी के संरक्षक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो परमेंद्र कुमार बाजपेई हैं। इस बौद्धिक विमर्श में देश के पुरातत्वविद्, इतिहासकार और संस्कृत साहित्य विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। जिनमें देवदत्त प्रसाद क्षेत्रीय संयोजक प्रज्ञा प्रवाह, प्रो लक्ष्मी नारायण अध्यक्ष चिति, प्रो कृष्ण कन्हैया जी अध्यक्ष इतिहास विभाग जेपी विश्वविद्यालय, प्रो अजीत कुमार अध्यक्ष इतिहास संकलन समिति सह-संरक्षक और डॉ रितेश्वर तिवारी संयोजक स्नातकोत्तर इतिहास विभाग मुख्य रूप से शामिल है।

कार्यक्रम संयोजक डॉ रितेश्वर तिवारी ने बताया कि चिरांद में नवपाषाण, ताम्रपाषाण और प्रारंभिक ऐतिहासिक काल की सांस्कृति अटूट क्रम में मिलती हैं। गंगा, सरयू और सोन जैसी नदियों के संगम पर स्थित यह स्थल कभी निर्जन नहीं हुआ। यहाँ नवपाषाण काल से ही उत्तम जल प्रबंधन और कृषि के प्रमाण मिलते हैं, जो इसे भारत के प्राचीन सतत विकास का एक मॉडल स्थल बनाते हैं।

इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य इतिहास लेखन की उस परंपरा को चुनौती देना है जो केवल भौतिक अवशेषों को प्रमाण मानती है। यह सेमिनार चिरांद को केवल एक पुरातात्त्विक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि सभ्यतागत स्मृति के केंद्र के रूप में पुनर्स्थापित करने का एक प्रयास है। इस आयोजन से सारण के ऐतिहासिक गौरव को नई पहचान मिलने और भारतीय ज्ञान-परंपरा को समझने के नए आयाम खुलने की उम्मीद है।

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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय कुमार

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