फरक्का जलसंधि बिहार के हितों की अनदेखी का बड़ा उदाहरण, 30 वर्षों का अन्याय अब खत्म होना चाहिए: संजय झा
भागलपुर, 03 नवंबर (हि.स.)। जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से मंगलवार को भागलपुर के टाउन हॉल में 'नीतीश संवाद' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मुख्य रूप से ऐतिहासिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से संवेदनशील 'फरक्का जलसंधि' और इसके कारण बिहार में उत्पन्न होने वाली भीषण बाढ़ व सुखाड़ की समस्या पर केंद्रित रहा।
कार्यक्रम में जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद संजय झा, प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा, बिहार सरकार के मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल तथा सांसद अजय कुमार मंडल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही मुख्य अतिथियों का कार्यकर्ताओं ने फूलों की बारिश कर और चांदी का मुकुट पहनाकर जोरदार स्वागत किया।
इस दौरान बिहार की प्रसिद्ध लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली, जहां झिंझिया नृत्य की प्रस्तुति से पूरा टाउन हॉल परिसर गूंज उठा। कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत दीप प्रज्वलन और बिहार गीत के गायन के साथ की गई।
संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने फरक्का जलसंधि को लेकर तत्कालीन सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा, गंगा नदी बिहार में लगभग 400 किलोमीटर तक बहती है, लेकिन 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुए गंगा जल बंटवारे के समझौते में बिहार के हितों की पूरी तरह अनदेखी की गई। यह संधि बिहारवासियों के साथ हुए अन्याय का प्रतीक है, जिसका दंश प्रदेश पिछले तीन दशकों से झेल रहा है।
संजय झा ने राज्य में हर साल आने वाली विनाशकारी बाढ़ की समस्या को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि फरक्का बराज के कारण नदियों में गाद (सिल्ट) जमने की समस्या भयावह हो चुकी है। नदी की गहराई घटने से बिहार के कई जिले हर साल जलमग्न हो जाते हैं। इससे लाखों लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है, किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती हैं और बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस वर्ष इस संधि की अवधि पूरी हो रही है, इसलिए इसके नवीनीकरण पर बिहार के जल हितों को ध्यान में रखकर गंभीरता से पुनर्विचार करना और ठोस जल प्रबंधन की पहल करना बेहद जरूरी है।
जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने अपने संबोधन में कहा कि पार्टी के सर्वमान्य नेता और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हमेशा बिहार के जल अधिकारों और फरक्का बराज से होने वाले नुकसान के मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया है। उन्होंने कहा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए इस समझौते का 73 प्रतिशत बोझ अकेले बिहार उठा रहा है। बरसात के दिनों में गाद जमने के कारण बाढ़ आती है और सूखे के दिनों में पानी डाइवर्ट होने से जिलों में सुखाड़ की स्थिति बन जाती है। इस अन्याय को अब खत्म होना चाहिए। कुशवाहा ने कार्यकर्ताओं और आम लोगों से आह्वान किया कि वे बिहार के जल अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी आवाज को और बुलंद व सशक्त बनाएं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि बिहार के 13 करोड़ लोगों के जीवन और अस्तित्व का सवाल है। कार्यक्रम में कहलगांव, सन्हौला, गोराडीह समेत जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे थे। नेताओं के वक्तव्यों को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता में खासा उत्साह देखा गया।
इस अवसर पर उपाध्यक्ष सह विधान पार्षद संजय सिंह, विधायक ललित नारायण मंडल, विधायक शुभानंद मुकेश, विधायक मनीष कुमार, विधान पार्षद विजय सिंह, पूर्व सांसद कहकशां परवीन, प्रह्लाद सरकार और जिलाध्यक्ष विवेकानंद गुप्ता सहित जदयू के तमाम प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

