नेपाल में लगातार हो रही बारिश से गंडक नदी में गहराया बाढ़ का खतरा
पटना, 28 सितंबर (हि.स.)। नेपाल में गंडक नदी के जल अधिग्रहण क्षेत्र में बीते चार दिन से लगातार हो रही
रही मूसलाधार बारिश के बाद गंडक नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। वाल्मीकिनगर गंडक बराज से 5 लाख 43 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद पश्चिमी चंपारण से लेकर पूर्वी चंपारण तक नदी के तटवर्ती इलाकों में हड़कंप मच गया है। कई जगहों पर बाढ़ का पानी गांवों और सड़कों में प्रवेश कर चुका है, जबकि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की सलाह दी गई है।
लगातार दो दिनों से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण सोमवार सुबह तक पूर्वी चंपारण के अरेराज अनुमंडल के गंडक दियारा और तटीय क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर होने की आशंका है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है। गंडक के बढ़ते दबाव ने सरेया, मिश्रौलिया, पुछरिया, बिंद टोली और नवादा समेत कई गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पानी पहुंचने लगा है और कई निचले इलाकों में बस्तियों के जलमग्न होने का खतरा बना हुआ है।
पश्चिमी चंपारण में भी गंडक का असर साफ दिखाई दे रहा है। वाल्मीकिनगर, बगहा-2, बगहा-1, पिपरासी, मधुबनी, ठकहरा, भितहा, योगापट्टी, बैरिया और नौतन के दियारा क्षेत्रों में सैकड़ों घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। बगहा शहर तक पानी पहुंचने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। बगहा-वाल्मीकिनगर मुख्य सड़क भी कई जगह पानी में डूब गई है, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ है।
बाढ़ का असर केवल इंसानी बस्तियों तक सीमित नहीं है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व यानी वीटीआर के जंगल क्षेत्र में भी पानी फैलने लगा है। बाढ़ के कारण जंगली जानवर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की तलाश में जंगल से बाहर निकल रहे हैं। इससे आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों के बीच भी डर बढ़ गया है। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के सामने इंसानों के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा भी चुनौती बन गई है।
गंडक के साथ-साथ बागमती और कोसी नदी के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पूर्वी चंपारण के अलावा मधुबनी, दरभंगा, सुपौल और सहरसा के कई गांवों पर भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में आने वाले कुछ घंटे बिहार के कई जिलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने क्षेत्रीय अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट रहने का निर्देश दिया है। चंपारण से वैशाली तक तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों को खास तौर पर कटाव, रिसाव और तटबंधों पर बढ़ते पानी के दबाव पर नजर रखने को कहा गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद चौधरी

