तीन नए कानून को लेकर पुलिस पदाधिकारियों का प्रशिक्षण हुआ शुरू

तीन नए कानून को लेकर पुलिस पदाधिकारियों का प्रशिक्षण हुआ शुरू
तीन नए कानून को लेकर पुलिस पदाधिकारियों का प्रशिक्षण हुआ शुरू


तीन नए कानून को लेकर पुलिस पदाधिकारियों का प्रशिक्षण हुआ शुरू


तीन नए कानून को लेकर पुलिस पदाधिकारियों का प्रशिक्षण हुआ शुरू


-1 जुलाई से देश भर में प्रभावी होंगे नए कानून

-नए कानून में दंड की जगह न्याय देने पर जोर,डिजिटल होगी प्रक्रिया

पूर्वी चंपारण,10 जून (हि.स.)। देशभर में 01 जुलाई 2024 से प्रभावी होने वाले तीन नए आपराधिक कानून को लेकर पुलिस पदाधिकारियों का प्रशिक्षण शुरू हुआ है।

एसपी आफिस के सभागार एवं समाहरणालय परिसर के राजेन्द्र भवन में यह प्रशिक्षण हाइब्रिड मोड़ में सत्रवार शुरू हुआ है। डिजिटल मोड़ में राज्य पुलिस मुख्याकय की ओर से इस प्रशिक्षण को दिया जा रहा है। जिसका उद्देश्य दंड संहिता से न्याय संहिता की ओर अग्रसर करना है।

उल्लेखनीय है,कि देश मे वर्षों पुराने कानूनों को एक नए रूप में लागू किया जा रहा है। भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के माध्यम से एक नए युग की शुरुआत होगी। इन तीन नए प्रमुख कानूनों का मकसद सजा देने की बजाय न्याय देना है ।मसलन साइबर अपराध के मामलों में बढ़ोतरी हुई है , जबकि पुराने कानूनों में साइबर अपराधों के लिए कोई प्रावधान नहीं था।

नए कानून में इसके लिए व्यवस्था की गयी है।इन नए कानूनों में सूचना प्रौद्योगिकी के साथ ही फॉरेंसिक लैब की स्थापना पर बल दिया गया है। इन कानूनों में ई-रिकॉर्ड का प्रावधान किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत जीरो एफआईआर, ई-एफआईआर और चार्जशीट डिजिटल होंगे । पीड़ित को 90 दिनों के भीतर सूचना प्रदान की जाएगी और 7 साल या उससे अधिक की सजा के प्रावधान वाले मामलों में फॉरेंसिक जांच अनिवार्य होगी । वही राजद्रोह कानून की जगह देशद्रोह को परिभाषित किया गया है।

आतंकवाद से जुड़े मामलों में मृत्युदंड या आजीवन कारावास तक का प्रावधान है।इन नए कानूनों के तहत थाने से कोर्ट तक कि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। इसके अन्यर्गत देश में एक ऐसी न्यायिक प्रणाली स्थापित होगी जिसके जरिए तीन वर्षों के भीतर न्याय मिल सकेगा । जानकारी के मुताबिक 35 धाराओं में न्याय प्रक्रिया का समय सीमा निर्धारित किया गया है । इलेक्ट्रॉनिक तरीके से शिकायत दायर करने के तीन दिन के भीतर एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान है, साथ ही यौन उत्पीड़न के मामलों में सात दिन के भीतर जांच रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा।

हिन्दुस्थान समाचार/प्रभात/गोविन्द

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