टीएमबीयू में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न: विकसित भारत के लिए समावेशी ग्रामीण अर्थव्यवस्था जरूरी

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टीएमबीयू में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न: विकसित भारत के लिए समावेशी ग्रामीण अर्थव्यवस्था जरूरी


भागलपुर, 05 नवंबर (हि.स.)। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के ग्रामीण अर्थशास्त्र एवं सहकारी प्रबंधन विभाग तथा औद्योगिक संबंध एवं कार्मिक प्रबंधन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय बहुविषयक संगोष्ठी का समापन हो गुरुवार को हो गया। “विकसित भारत @ 2047 के लिए समावेशी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मानव संसाधन विकास” विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी के दूसरे दिन तकनीकी सत्रों में 22 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। सत्रों के दौरान ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कौशल विकास, भूमि क्षरण, महिला सशक्तीकरण एवं समावेशी उद्यमशीलता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा हुई।

कृषि आर्थिक अनुसंधान केंद्र के डॉ. रंजन कुमार सिन्हा ने भूमि उपयोगिता व क्षरण पर, जबकि डॉ. उमेश प्रसाद नीरज ने गांधीवादी अवधारणा के तहत कौशल विकास और संसाधनों के समान वितरण पर अपने विचार रखे। डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि शिक्षित और स्वस्थ मानव पूंजी से ही कृषि श्रम उत्पादकता में सुधार संभव है। ऑनलाइन माध्यम से जुड़े मेरठ विश्वविद्यालय के प्रो. विक्रम वर्मा ने डिजिटलीकरण, स्वयं सहायता समूहों की मजबूती और महिलाओं के संपत्ति अधिकारों पर जोर दिया, वहीं प्रो. तूलिका सक्सेना ने सतत विकास के लिए नवाचार आधारित दृष्टिकोण को जरूरी बताया।

तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता डॉ. राजीव कुमार सिन्हा एवं राजेश तिवारी ने की, जिसमें अभिलाषा, शिवेश, अंजली, साक्षी और राजकुमार समेत कई शोधार्थियों ने शोध पत्र पढ़े। समापन सत्र में मुख्य प्रतिवेदक डॉ. रंजन कुमार सिन्हा ने दो दिवसीय संगोष्ठी की विस्तृत रिपोर्ट पेश की। इस गरिमामयी समापन के अवसर पर पूर्व कुलपति प्रो. के.के. सिंह, प्रो. आर.सी.पी. वर्मा, प्रो. रविशंकर चौधरी, विभागाध्यक्ष और कृषि आर्थिक अनुसंधान केंद्र के मानद निदेशक प्रो. राजेश मिश्रा, प्रो. रामप्रवेश सिंह, प्रो. निर्मला कुमारी और डॉ. मणिकांत समेत कई वरिष्ठ शिक्षाविदों ने अपने विचार रखे।

वक्ताओं ने सर्वसम्मति से कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को पाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देना अनिवार्य है। इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनोद कुमार ओझा, वित्त पदाधिकारी, प्रो. उग्र मोहन झा, प्रो. बाल कृष्ण झा, आयोजन सचिव डॉ. अश्वजीत राठौर, डॉ. राजकमल अन्ना सहित बड़ी संख्या में शिक्षक व शोधार्थी उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

Livevns.news Desk
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