बिहार के पारंपरिक उत्पाद नालंदा का बावन बूटी को मिला भौगोलिक संकेतक जी आई टैग

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नालंदा, 14 जून (हि.स.)।

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक तथा बिहार सरकार के संयुक्त प्रयासों से बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक एवं हस्तशिल्प विरासत को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त हुई है। बिहार के विशिष्ट पारंपरिक उत्पाद में नालंदा के बावन बूटी साड़ी एवं फैब्रिक को भौगोलिक संकेतक (जी आई) टैग प्रदान किया गया है।

यह उपलब्धि राज्य के शिल्पकारों, बुनकरों एवं ग्रामीण उत्पादक समुदायों के लिए गर्व का विषय है। जी आई टैग किसी उत्पाद की विशिष्टता, गुणवत्ता और भौगोलिक पहचान को कानूनी संरक्षण प्रदान करने के अंतर्गत किया जाता हैI जी आई टैग प्रदान करने का कार्य भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री, चेन्नई द्वारा किया जाता है। बिहार के इन उत्पादों के जी आई पंजीकरण की प्रक्रिया में ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन वाराणसी के महासचिव, पद्मश्री डॉ रजनीकांत का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ।

नाबार्ड ने उत्पादक समूहों, शिल्पकार संगठनों तथा स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर इन उत्पादों के दस्तावेजीकरण, पंजीकरण और जी आई टैग प्राप्त करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नालंदा जिले की प्रसिद्ध बावन बूटी बिहार की प्राचीन बुनकरी परंपरा का एक अद्वितीय उदाहरण है। इस विशिष्ट वस्त्रकला में कपड़े पर 52 प्रकार के पारंपरिक बौद्ध एवं सांस्कृतिक प्रतीकों (बूटी) को हाथकरघे पर बुना जाता है। इस कला का विकास मुख्य रूप से बसवन बिगहा और आसपास के क्षेत्रों में हुआ, जहां पीढ़ियों से बुनकर परिवार इस परंपरा का संरक्षण करते आ रहे हैं। जिसे मुख्यतः महिलाएं पारंपरिक पर्व-त्योहारों और सामाजिक अवसरों पर बनाती रही हैं।

इस कला में प्राकृतिक रंगों एवं पारंपरिक प्रतीकों के माध्यम से लोक जीवन, पारिवारिक संबंधों, धार्मिक आस्थाओं तथा ग्रामीण संस्कृति का सजीव चित्रण किया जाता है।इन उत्पादों कोजी आई टैग प्राप्त होने से बिहार के हस्तशिल्प एवं हथकरघा क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इससे स्थानीय कारीगरों, बुनकरों तथा महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही, यह उपलब्धि ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को भी सशक्त बनाएगी। यह उपलब्धि बिहार की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण तथा राज्य के पारंपरिक उद्योगों को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रमोद पांडे

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