मुजफ्फरपुर पीएनजी ब्लास्ट मामले में आईओसीएल के बड़े अधिकारियों समेत 11 को बनाया आरोपी

WhatsApp Channel Join Now

मुजफ्फरपुर, 05 नवंबर (हि.स.)।

मुजफ्फरपुर के गोबरसही-डुमरी रोड पर हुए पीएनजी गैस पाइपलाइन ब्लास्ट मामले में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (।(आईओसीएल) के बड़े अधिकारियों समेत 11 लोगों के खिलाफ न्यायालय में परिवाद दायर किया गया है।

जनहित मंच के सचिव और अधिवक्ता सुशील कुमार सिंह ने यह परिवाद दाखिल किया है। इसमें आईओसीएल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य प्रमुख, पीएनजी प्रोजेक्ट हेड और तकनीकी-सुरक्षा अधिकारियों के अलावा पथ निर्माण विभाग के अभियंताओं, नाला निर्माण एजेंसी के प्रोपराइटर और जेसीबी चालक को आरोपी बनाया गया है। परिवाद में घटना को गंभीर लापरवाही का नतीजा बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच और आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है।

परिवाद के अनुसार, 2 नवंबर 2026 को दोपहर करीब 12:20 बजे गोबरसही-डुमरी रोड पर नाला निर्माण के दौरान जेसीबी से खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान भूमिगत पीएनजी गैस पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई और गैस का रिसाव शुरू हो गया। अधिवक्ता का आरोप है कि करीब 45 मिनट तक गैस रिसाव होता रहा, लेकिन संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों की ओर से समय रहते सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। इसके बाद गैस में आग लगने से भीषण विस्फोट हुआ।

परिवाद में दावा किया गया है कि इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि कई लोग झुलसकर घायल हुए। आसपास की दुकानों, मकानों, वाहनों और अन्य संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा। इसमें आरोप लगाया गया है कि पाइपलाइन के आसपास खुदाई से पहले गैस कंपनी से नक्शा, पाइपलाइन की वास्तविक स्थिति, गहराई और सुरक्षा संबंधी निर्देश प्राप्त नहीं किए गए। साथ ही, निर्माण एजेंसी और पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों ने भी आवश्यक अनुमति और सुरक्षा प्रक्रिया सुनिश्चित नहीं की।

पुलिस जांच पर भी जताई आशंका

परिवाद में कहा गया है कि घटना को लेकर सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज है, लेकिन आशंका है कि जांच केवल मौके पर काम करने वाले कर्मचारियों और निर्माण एजेंसी तक सीमित रह सकती है। इसमें निर्णय लेने और निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले बड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की गई है।

अधिवक्ता ने न्यायालय से सदर थाने में दर्ज प्राथमिकी की जांच की स्थिति रिपोर्ट तलब करने, आईओसीएल से पाइपलाइन का नक्शा, गहराई, सुरक्षा ऑडिट, रखरखाव और निरीक्षण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। वहीं, पथ निर्माण विभाग से नाला निर्माण की प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति, कार्यादेश, खुदाई की अनुमति और गैस कंपनी से मिली एनओसी की जानकारी मांगे जाने का अनुरोध किया है। परिवाद में मृतक के आश्रितों और घायलों को पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत मुआवजा एवं पुनर्वास दिलाने की भी मांग की गई है। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए घनी आबादी वाले इलाकों से गुजरने वाली भूमिगत PNG पाइपलाइनों का तकनीकी सुरक्षा ऑडिट कराने और निर्माण कार्य के दौरान अनिवार्य सुरक्षा प्रक्रिया लागू करने की मांग की गई है।

हिन्दुस्थान समाचार / मनोज कुमार

Livevns.news Desk
Livevns.news Desk

772993 Articles

Share this story