बारह साल पुराने मामले में सांसद सिग्रीवाल और विधायक जनक सिंह कोर्ट में हुए पेश
सारण, 14 मई (हि.स.)। बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर 12 वर्ष पूर्व किए गए आंदोलन के एक पुराने मामले में गुरुवार को सारण जिले के कई भाजपा नेताओं ने न्यायालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
छपरा स्थित विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल और तरैया विधायक जनक सिंह सहित कई नेता सदेह उपस्थित हुए। यह मामला 2014 का है जब भारतीय जनता पार्टी ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के आह्वान पर पूरे प्रदेश में रेल चक्का जाम आंदोलन किया था।
इस आंदोलन के दौरान छपरा में भी रेल परिचालन घंटों बाधित रहा था। इसी घटना को संज्ञान में लेते हुए छपरा कचहरी के तत्कालीन स्टेशन अधीक्षक ने छपरा रेल थाना में प्राथमिकी संख्या 691/14 दर्ज कराई थी। विशेष विचारण वाद संख्या 22/2025 में आज अभियुक्तों के विरुद्ध दोष का सारांश सुनाया गया।
इस अवसर पर महाराजगंज के सांसद सह तत्कालीन जलालपुर विधायक जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, तरैया के विधायक जनक सिंह, पूर्व जिला अध्यक्ष वेद प्रकाश उपाध्याय और गामा सिंह व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में हाजिर हुए। वहीं पूर्व विधायक ज्ञानचंद मांझी जिनका हाल ही में गुर्दा प्रत्यारोपण हुआ है स्वास्थ्य कारणों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यवाही में शामिल हुए।
कार्यवाही के दौरान सभी नेताओं ने न्यायालय के समक्ष खुद को पूर्णतः निर्दोष बताया और कहा कि उन्होंने केवल जनता के हितों की आवाज उठाई थी। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले में अगली तिथि निर्धारित कर दी है। अधिवक्ता चेंबर में मीडिया से बात करते हुए सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने कहा 2014 में भाजपा ने विकसित बिहार के संकल्प के साथ पूरे राज्य में आंदोलन चलाया था। हमारी मांग जायज और बिहार की समृद्धि के लिए थी। उस समय के प्रशासन ने इसे राजनीतिक रंग देते हुए प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसके कारण आज हमें न्यायालय में आना पड़ा है। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। वहीं तरैया विधायक जनक सिंह ने इसे पूरी तरह एक राजनीतिक आंदोलन करार दिया। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रकाश रंजन श्रीवास्तव उर्फ नीकू, पवन कुमार श्रीवास्तव, दुर्गेश प्रकाश बिहारी, मनोज कुमार सिंह और दुलारचंद माझी ने मजबूती से अपना पक्ष रखा। सरकारी पक्ष की ओर से एपीपी ने दलीलें पेश कीं।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय कुमार

