मॉडल स्कूलों में क्लास लेंगे प्रशासनिक पदाधिकारी

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मॉडल स्कूलों में क्लास लेंगे प्रशासनिक पदाधिकारी


कटिहार, 01 सितंबर (हि.स.)। जिले के सभी नव-उत्क्रमित एवं स्थापित 'सरस्वती विद्या निकेतन' (मॉडल स्कूलों) में शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने और बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाने के लिए प्रशासनिक पदाधिकारियों को विद्यालयों से सम्बद्ध (टैग) किया गया है। मंगलवार को आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने यह निर्देश जारी करते हुए कहा कि नामित पदाधिकारी अब स्कूलों में सूक्ष्म पर्यवेक्षण के साथ-साथ खुद भी विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे और उनका मार्गदर्शन करेंगे।

बैठक में डीएम ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा राज्य भर में 551 आधुनिक सरस्वती विद्या निकेतन विद्यालयों का लोकार्पण किया गया है, जिनका उद्देश्य छात्र-छात्राओं को स्मार्ट क्लासरूम, ई-लाइब्रेरी, आधुनिक विज्ञान व कंप्यूटर लैब और खेलकूद जैसी उत्कृष्ट सुविधाओं के जरिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है। इसी व्यवस्था को धरातल पर प्रभावी बनाने के लिए अधिकारियों को स्कूलों की सीधी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अतिरिक्त, जिले का कोई भी अन्य इच्छुक पदाधिकारी भी अपनी रुचि के अनुसार विद्यालय व विषय चुनकर स्वेच्छा से अध्यापन कार्य कर सकता है।

अधिकारियों के जिम्मे होगा अध्यापन और सघन पर्यवेक्षण:

निर्देशानुसार, नामित पदाधिकारी प्रत्येक सप्ताह आवंटित स्कूल में अपनी शैक्षणिक योग्यता और अभिरुचि के अनुसार 1 से 2 या उससे अधिक कक्षाएं स्वयं लेंगे। इसके अलावा, वे कमजोर विद्यार्थियों के लिए संचालित 'रेमेडियल क्लास' की निगरानी, आधुनिक लैब व स्मार्ट क्लास के नियमित उपयोग, शिक्षकों की ससमय उपस्थिति तथा सिलेबस को समय पर पूरा कराने का काम सुनिश्चित करेंगे। सभी पदाधिकारी अपनी साप्ताहिक कक्षा और निरीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) को सौंपेंगे, जिसे समेकित कर डीएम के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

प्रत्येक शनिवार को साप्ताहिक टेस्ट और नियमित पीटीएम के निर्देश:

जिलाधिकारी ने उपस्थित प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया कि स्कूलों में नियमित रूप से पेरेंट्स-टीचर मीटिंग (पीटीएम) आयोजित की जाए। छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए खेलकूद को दैनिक रूटीन में अनिवार्य रूप से शामिल करने, प्रत्येक शनिवार को नियमित साप्ताहिक टेस्ट आयोजित करने और पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देने का कड़ा निर्देश दिया गया। साथ ही स्कूलों में ड्रॉप-आउट दर को न्यूनतम करने और छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा गया।

हिन्दुस्थान समाचार / विनोद सिंह

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