भागलपुर में गंगा का रौद्र रूप, मंत्री ने लिया राघोपुर का जायजा, जर्मन हैंगर टेंट में रहेंगे पीड़ित

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भागलपुर में गंगा का रौद्र रूप, मंत्री ने लिया राघोपुर का जायजा, जर्मन हैंगर टेंट में रहेंगे पीड़ित


भागलपुर, 02 सितंबर (हि.स.)। जिले में गंगा नदी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। नवगछिया अनुमंडल के राघोपुर में भीषण कटाव के कारण हालात बेहद चिंताजनक और बेकाबू हो गए हैं।

गंगा के तेज बहाव और लगातार हो रहे भू-कटाव की चपेट में आने से तटबंध का एक बड़ा हिस्सा नदी में विलीन हो गया है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों की आस्था के केंद्र प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर और हनुमान मंदिर भी भरभराकर गंगा नदी में समाहित (ध्वस्त) हो चुके हैं।

मंदिरों के नदी में समाने से इलाके के लोगों में भारी मायूसी और दहशत का माहौल है। लगातार बिगड़ते हालातों के बीच बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री और क्षेत्रीय विधायक ई कुमार शैलेंद्र ने बुधवार को राघोपुर पहुंचकर कटाव की स्थिति का स्थलीय जायजा लिया।

मंत्री ने मौके पर मुस्तैद जल संसाधन विभाग के अभियंताओं से वर्तमान स्थिति की तकनीकी जानकारी ली। उन्होंने कटाव रोधी कार्य की सुस्त रफ्तार पर नाराजगी जताते हुए बचाव कार्यों में तेजी लाने और युद्ध स्तर पर काम करने के आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

कटाव स्थल का निरीक्षण करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री ई कुमार शैलेंद्र ने कहा, गंगा नदी अब अपना नया रास्ता बना रही है। स्थिति चुनौतीपूर्ण है और अब हमें प्रकृति के इस रौद्र रूप से संघर्ष करना है। कटाव को रोकने के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। रेलवे लाइन को कटाव से बचाने और सुरक्षा के सवाल पर मंत्री भावुक हो गए।

उन्होंने कहा, रेलवे लाइन और आबादी को बचाने के लिए मां दुर्गा और बजरंगबली ने खुद की आहुति दे दी है। अब हम लोग हर हाल में सर्वाइव करेंगे और इस स्थिति को स्टेबल भी करेंगे। रेलवे ट्रैक तक कटाव को पहुंचने नहीं दिया जाएगा। भीषण कटाव के कारण राघोपुर और आसपास के इलाकों से बड़े पैमाने पर लोगों का पलायन हो रहा है। बेघर हो रहे लोगों की सुध लेते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार प्रभावित लोगों के रहने और खाने-पीने की मुकम्मल व्यवस्था कर रही है। पीड़ितों को आश्रय देने के लिए बड़े पैमाने पर अत्याधुनिक 'जर्मन हैंगर टेंट' लगाने की तैयारी की जा रही है।

इसके लिए कई आपदा प्रबंधन और टेंट निर्माण एजेंसियों से बातचीत अंतिम दौर में है। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि विस्थापित हो रहे परिवारों को तत्काल राहत सामग्री और सामुदायिक रसोई के जरिए भोजन उपलब्ध कराया जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

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