जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर प्रबुद्ध लोगों की बैठक

WhatsApp Channel Join Now
जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर प्रबुद्ध लोगों की बैठक


भागलपुर, 23 जुलाई (हि.स.)। दिल्ली के जंतर-मंतर और बिहार में शिक्षा एवं लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल पर शांतिपूर्ण एवं अहिंसक प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज, आँसू गैस के गोले और रबर बुलेट के प्रयोग जैसी दमनात्मक एवं हिंसक कार्रवाई के विरोध में गुरुवार को भागलपुर के नागरिकों की ओर से वेरायटी चौक स्थित एक होटल में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक की अध्यक्षता प्रसून लतांत ने की, जबकि संचालन दीपक कुमार मंडल ने किया। विषय प्रवेश कराते हुए गौतम कुमार ने कहा कि देश के युवा शिक्षा व्यवस्था में अमूलचूल बदलाव और अपने भविष्य को सुरक्षित करने की मांग को लेकर सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा लीक से शुरू हुआ यह आंदोलन अब एक व्यापक जनांदोलन का रूप ले चुका है। व्यवस्था के प्रति युवाओं का बढ़ता आक्रोश इस बात का संकेत है कि वे निर्णायक लड़ाई के लिए तैयार हैं।

अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के पूर्व कुलपति डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि देश के वर्तमान हालात 1974 के छात्र आंदोलन से भी अधिक चिंताजनक मोड़ पर पहुँच चुके हैं। उनका कहना था कि सरकार ने छात्र-युवाओं के आंदोलन के प्रति दमनकारी नीति अपनाकर उनके आक्रोश को और बढ़ा दिया है। प्रवीण कुमार कुशवाहा ने कहा कि जंतर-मंतर से संसद भवन तक हुए शांतिपूर्ण एवं अहिंसक प्रदर्शन पर जिस प्रकार पुलिसिया दमन किया गया, उसकी जितनी भी निंदा की जाए, वह कम है। अनिता शर्मा ने कहा कि अपनी जिम्मेदारियों से बचने का सरकार का रवैया अत्यंत निंदनीय है। सरकार की नीतियों से उत्पन्न असंतोष के कारण आज छात्र-युवा सड़कों पर हैं। उनसे संवाद करने के बजाय उन पर गंभीर आरोप लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

बैठक को गांधी शांति प्रतिष्ठान के संजय कुमार, उज्जवल घोष, मृदुला सिंह, कुमारी श्वेता आदि ने भी संबोधित किया। अध्यक्षीय संबोधन में प्रसून लतांत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सत्ता तंत्र जमीनी सच्चाइयों को समझने में विफल हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार केवल अपने सूचना तंत्र के भरोसे वास्तविक जनभावनाओं की उपेक्षा करती रही, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। बैठक में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं, रंगकर्मियों, साहित्यकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं एवं बुद्धिजीवियों ने संयुक्त रूप से कहा कि वे छात्र-युवाओं के लोकतांत्रिक आंदोलन के साथ खड़े हैं तथा सरकार से उनकी सभी मांगों पर सकारात्मक पहल करने और शीघ्र संवाद स्थापित करने की अपील करते हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

Share this story