बीएयू में प्रसार शिक्षा परिषद् की 29वीं बैठक सम्पन्न, कृषि प्रसार को नई दिशा देने वाली अनेक पहल की घोषणा

WhatsApp Channel Join Now
बीएयू में प्रसार शिक्षा परिषद् की 29वीं बैठक सम्पन्न, कृषि प्रसार को नई दिशा देने वाली अनेक पहल की घोषणा


भागलपुर, 28 जुलाई (हि.स.)। बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर में मंगलवार को प्रसार शिक्षा परिषद् की 29वीं बैठक का सफल आयोजन किया गया। बैठक में विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित सभी 22 कृषि विज्ञान केन्द्रों के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान, विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों, कृषि प्रसार विशेषज्ञों तथा प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. आर. के. सोहाने ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की प्रसार गतिविधियों एवं आगामी वर्ष की कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। बैठक में देश के प्रतिष्ठित कृषि प्रसार विशेषज्ञों ने विश्वविद्यालय द्वारा संचालित प्रसार कार्यक्रमों का अवलोकन किया तथा अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। मुख्य अतिथियों में पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह, योजना आयोग के पूर्व सलाहकार डॉ. वी. वी. सदामते, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली के संयुक्त निदेशक डॉ. आर. एन. पडारिया (ऑनलाइन माध्यम से), आईसीएआर-अटारी, पटना के निदेशक डॉ. डी. बी. सिंह तथा बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. ए. एन. दहिया शामिल रहे।

अध्यक्षीय संबोधन में बीएयू कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय के सभी 22 कृषि विज्ञान केन्द्रों ने कृषि प्रसार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने विकसित कृषि संकल्प अभियान, खेत बचाओ अभियान तथा पोषण अभियान जैसी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन की सराहना करते हुए कहा कि बिहार कृषि रोडमैप के अंतर्गत विश्वविद्यालय ने निर्धारित समय से पूर्व 10 लाख किसानों तक पहुँच बनाने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। कुलपति ने जल संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कृषि विज्ञान केन्द्रों को किसानों के सहयोग से पुराने तालाबों के जीर्णोद्धार के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया।

उन्होंने विश्वविद्यालय की महत्वाकांक्षी “किसान लाइब्रेरी” पहल को प्रत्येक क्षेत्र में विस्तार देने तथा किसानों तक कृषि साहित्य की सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों को अपने परिसर में डॉ. जरदालू के पौधे लगाने, स्मार्ट न्यूट्री किचेन गार्डन विकसित करने तथा एक्सटेंशन इम्पैक्ट कार्ड तैयार करने के निर्देश दिए। विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान डॉ. ए. के. सिंह ने कहा कि किसी भी कृषि अनुसंधान की सफलता तभी सार्थक है, जब उसका लाभ किसानों के खेतों तक पहुँचे।

उन्होंने शोध एवं प्रसार के बीच सुदृढ़ समन्वय को विश्वविद्यालय की प्राथमिकता बताया। बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. ए. एन. दहिया ने कहा कि बिहार के पास उपजाऊ मिट्टी और पर्याप्त जल संसाधन उपलब्ध हैं तथा कृषि विकास के क्षेत्र में राज्य के लिए अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने बिहार की पारम्परिक एवं पौराणिक पशुपालन प्रणालियों के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण की आवश्यकता पर भी बल दिया। योजना आयोग के पूर्व सलाहकार डॉ. वी. वी. सदामते ने कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में प्रत्येक बार शोध एवं प्रसार गतिविधियों में नवीनता देखने को मिलती है और यह संस्थान कृषि प्रसार के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत आधार स्थापित कर चुका है।

बैठक के दौरान सभी 22 कृषि विज्ञान केन्द्रों ने अपने-अपने क्षेत्र में किए गए कार्यों एवं उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण किया, जिस पर विशेषज्ञों ने विस्तृत चर्चा करते हुए भविष्य के लिए उपयोगी सुझाव दिए। कार्यक्रम का समापन कृषि प्रसार को और अधिक प्रभावी, नवाचार आधारित तथा किसान-केंद्रित बनाने के संकल्प के साथ हुआ।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

Share this story