सारण में ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपियों का होगा संरक्षण
सारण, 04 अप्रैल (हि.स.)। कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा ज्ञान भारतम मिशन के तहत एक पहल शुरू की गई है। इस मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के विभिन्न संस्थानों और निजी व्यक्तियों के पास उपलब्ध दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण एवं उनके डिजिटाइजेशन की रणनीति तैयार की गई।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि पूर्व में सर्वे के माध्यम से चिन्हित किए गए संस्थानों और व्यक्तियों से संबंधित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तत्काल संपर्क स्थापित करें। मिशन की मुख्य विशेषता यह है कि पांडुलिपियां मूल संग्रहकर्ता के पास ही सुरक्षित रहेंगी, विभाग केवल उनका डिजिटाइजेशन, संरक्षण, अनुसंधान और अनुवाद कराकर उन्हें विश्व पटल पर प्रस्तुत करेगा। इसके लिए विशेष रूप से विकसित मोबाइल ऐप के उपयोग हेतु सभी संबंधित पदाधिकारियों को शीघ्र प्रशिक्षण देने का भी निर्देश दिया गया।
बैठक में पांडुलिपियों को परिभाषित करते हुए स्पष्ट किया गया कि कागज, भोज पत्र, ताड़ पत्र, कपड़ा या धातु पर हाथ से लिखे गए वे ग्रंथ जो कम से कम 75 वर्ष पुराने हों, उन्हें इस श्रेणी में रखा जाएगा। ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के पुराने दस्तावेजों को भी इस संकलन में शामिल किया गया है। जयप्रकाश विश्वविद्यालय की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए जिलाधिकारी ने विश्वविद्यालय के शोधार्थियों से सहयोग का आह्वान किया।
इतिहास विभाग के प्रोफेसर डॉ कृष्ण कन्हैया को विश्वविद्यालय का नोडल पदाधिकारी नामित किया गया है। बैठक में अपर समाहर्त्ता, उपनिदेशक सूचना जनसंपर्क रविंद्र कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जयप्रकाश विश्वविद्यालय के पूर्व कुल सचिव प्रोफेसर डॉक्टर सैयद राजा, जेपीयू के प्रोफेसर रविंद्र सिंह, जेपीयू के प्रोफेसर डॉ संजय कुमार जिला कला संस्कृति पदाधिकारी उपस्थित थे, जबकि सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। जिला प्रशासन ने अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति या संस्था के पास ऐसी दुर्लभ पांडुलिपियां उपलब्ध हों, तो वे जिला कला एवं संस्कृति कार्यालय को सूचित कर इस अभियान में अपना योगदान दे सकते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय कुमार

