राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ब्रांड के रूप में उभरा मखाना

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राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ब्रांड के रूप में उभरा मखाना


भागलपुर, 28 अप्रैल (हि.स.)। बिहार का मखाना उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ब्रांड के रूप में उभरा है। इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार ने मिलकर बिहार के मखाना को अंतरराष्ट्रीय पटल पर महत्ता दिलाई है।

सरकारी योजना और बिहार कृषि विश्वविद्यालय के प्रयास से सिल्क नगरी भागलपुर में भी मखाना की खेती संभव हो पाई है। उल्लेखनीय है कि अबतक मखाना की खेती सीमांचल इलाकों में सिमटा हुआ था। लेकिन भागलपुर के सबौर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति के पहल पर अब भागलपुर के किसानों ने मखाने की खेती शुरू कर दी है। सबसे बड़ी बात है की बीएयू के प्रयोग में मखाने की खेती के लिए तालाब नहीं बल्कि खेतियर जमीन जिसमें की सिर्फ तीन से चार फिट पानी की उपलब्धता हो उसमें मखाना आसानी से उपजाया जा सकता है।

इस बाबत बीएयू के कुलपति डॉ डीआर सिंह ने बताया कि किसानों को मखाने से जायदा मुनाफा हो सके इसके लिए सरकार प्रयास कर रही है। लेकिन किसानों को इसकी खेती करने में आसानी हो सके इस दिशा में बीएयू के वैज्ञानिक ने नई तकनीक के साथ उत्तम बीज की खोज की है। इसके लिए वैज्ञानिकों को भारत सरकार से पेटेंट भी मिला है। वैज्ञानिकों ने यह खोज निकाला है कि मखाने की खेती के लिए अच्छे किस्म के बीज में कौन से जिन उपलब्ध हैं।

फिलहाल कृषि विश्वविद्यालय के परिसर के तालाब में वैज्ञानिकों की देखरेख में मखाने पर अलग-अलग तरह के प्रयोग किया जा रहे हैं। भागलपुर और आसपास के जिलों में मखाने की खेती ज्यादा से ज्यादा किसानों को तक पहुंचे इसके लिए कृषि विश्वविद्यालय की ओर से लगातार प्रयास किया जा रहे हैं। हालांकि भागलपुर में अब किसान मखाने की खेती करने लगे हैं। इसके लिए वैज्ञानिक किसानों की मदद भी कर रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

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