भारत की आत्मा और गंगा-जमुनी तहजीब के प्रकाश स्तंभ हैं महात्मा गांधी: सैयद शाह फख्रे आलम हसन

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भारत की आत्मा और गंगा-जमुनी तहजीब के प्रकाश स्तंभ हैं महात्मा गांधी: सैयद शाह फख्रे आलम हसन


भागलपुर, 17 अक्टूबर (हि.स.)। रेशमी नगरी और दाता कर्ण की ऐतिहासिक धरती भागलपुर में हाल ही में संपन्न हुए तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार की गूंज लगातार बनी हुई है। इसी कड़ी में शनिवार को गांधी शांति प्रतिष्ठान से जुड़े वरिष्ठ शिक्षाविदों और पदाधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल खानकाह पीर दमड़िया शाह पहुँचा। प्रतिनिधिमंडल ने मक्का-मदीना की आध्यात्मिक यात्रा से लौटे खानकाह के सज्जादा नशीन सैयद शाह फख्रे आलम हसन से मुलाकात की। इस दौरान उन्हें भागलपुर की पारंपरिक मंजूषा कला से सुसज्जित अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

उल्लेखनीय है कि 30 सितंबर से 2 अक्टूबर तक “ज्ञान, कौशल और परंपरा : गांधी दृष्टि का समकालीन परिप्रेक्ष्य” विषय पर आयोजित इस भव्य अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में सज्जादा नशीन को विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था, किंतु धार्मिक यात्रा पर होने के कारण वे व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सके थे। प्रतिनिधिमंडल के साथ बेहद सौहार्दपूर्ण और बौद्धिक माहौल में हुए विचार-विमर्श के दौरान सज्जादा नशीन सैयद शाह फख्रे आलम हसन ने महात्मा गांधी के जीवन-दर्शन, सत्य, अहिंसा और हिंदू-मुस्लिम एकता पर अपने विचार रखे।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी केवल एक व्यक्ति या किसी विशेष कालखंड के विचारक नहीं थे, बल्कि वे हिंदुस्तान की आत्मा, भारतीय सभ्यता की नैतिक चेतना और करोड़ों देशवासियों के दिलों की धड़कन हैं। गांधीजी का व्यक्तित्व भारत की गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी भाईचारे और धार्मिक सहिष्णुता का ऐसा प्रकाशस्तंभ है, जिसकी रोशनी आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज के समय में समाज को प्रेम और राष्ट्रीय एकजुटता की सबसे ज्यादा जरूरत है। गांधीजी के विचार केवल किताबों और सभागारों तक सीमित न रहकर हमारी शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक व्यवहार का हिस्सा बनने चाहिए। सज्जादा नशीन ने खानकाह पीर दमड़िया शाह और राष्ट्रपिता के ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित करते हुए बताया कि जब गांधीजी भागलपुर आए थे, तब उनकी मुलाकात खानकाह के बुजुर्गों—उनके परदादा हजरत सैयद शाह फख्रे आलम साहब और दादा हजरत सैयद शाह शरफे आलम साहब से हुई थी। यह संबंध स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल है। उन्होंने यह भी याद किया कि लगभग दो वर्ष पूर्व गांधीजी के प्रपौत्र तुषार गांधी भी खानकाह आए थे, जिससे यह ऐतिहासिक और आत्मीय परंपरा आज भी जीवंत है। आयोजन के सफल समापन पर सज्जादा नशीन ने गांधी शांति प्रतिष्ठान और आयोजक मंडल को बधाई दी। इस गरिमामयी मुलाकात के दौरान प्रोफेसर मनोज कुमार, तकी जावेद, डॉ. उमेश प्रसाद नीरज सज्जाद खान, डॉ. रविशंकर कुमार चौधरी, सैयद मोहम्मद काशिफ, मोहम्मद अहमद बासूदा आदि मौजूद थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

Livevns.news Desk
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