नाथनगर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी, सभी पीड़ितों को मिले जीआर की राशि: जेड हसन

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नाथनगर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी, सभी पीड़ितों को मिले जीआर की राशि: जेड हसन


भागलपुर, 17 सितंबर (हि.स.)। जिले के नाथनगर विधानसभा क्षेत्र से राजद प्रत्याशी रहे वरिष्ठ नेता शेख ज्याउल हसन उर्फ जेड हसन ने क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों का व्यापक दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।

उन्होंने नगर निगम के वार्ड संख्या 1, 2, 3 और 4 सहित सबौर प्रखंड के रजनदीपुर और बाबूपुर के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा कर पीड़ितों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। दौरे के बाद राजद नेता जेड हसन ने कहा कि वे पिछले एक सप्ताह से नाथनगर विधानसभा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित सबौर और नाथनगर प्रखंड की करीब 20 से अधिक पंचायतों का लगातार दौरा कर रहे हैं।

उन्होंने जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि स्थिति बेहद चिंताजनक है। कई स्थानों पर पीड़ितों को अब तक पॉलिथीन सीट तक नसीब नहीं हुई है। जिन इलाकों से पानी धीरे-धीरे निकल रहा है, वहां न तो स्वास्थ्य विभाग की टीमें पहुंची हैं और न ही संक्रमण से बचाव के लिए चूना या ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जा रहा है।

जेड हसन ने राहत राशि के वितरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्राप्त जानकारी के अनुसार सबौर प्रखंड के लगभग 14 हजार और नाथनगर प्रखंड के 19 हजार परिवारों को ही जीआर की राशि उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने इन आंकड़ों को बेहद कम बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर शिकायतों का अंबार है। जब आप गांवों के चौराहों और गलियों में जाएंगे, तो हर दूसरा व्यक्ति जीआर राशि न मिलने की शिकायत कर रहा है। उन्होंने मांग की कि जितने परिवारों को अब तक राशि मिली है, कम से कम उतने ही और प्रभावित परिवारों को चिन्हित कर तुरंत सहायता राशि भेजने की जरूरत है।

शहरी क्षेत्र के वार्ड नंबर 1, 2, 3 और 4 के भ्रमण का जिक्र करते हुए राजद नेता ने कहा कि स्थानीय बुनकर परिवारों की हालत बदतर है। बाढ़ प्रभावित बुनकरों ने उन्हें बताया कि वर्ष 2015 में उन्हें आखिरी बार जीआर की राशि मिली थी। तब से लेकर आज तक हर साल वे कमर भर पानी में डूबने को मजबूर हैं, लेकिन सरकार या प्रशासन की तरफ से कोई वित्तीय सहायता या जीआर की राशि नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि भागलपुर जिले के लगभग 14 प्रखंड बाढ़ की चपेट में हैं, अतः सभी प्रभावित क्षेत्रों के पीड़ितों को समान रूप से सहायता मिले। जिन इलाकों से पानी निकल रहा है, वहां जलजनित बीमारियों और महामारी को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम, मोबाइल एंबुलेंस तथा बुनियादी दवाएं तुरंत तैनात की जाएं। जब तक प्रभावित क्षेत्रों में पूर्ण रूप से कीचड़ की सफाई और सैनिटाइजेशन का कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक पीड़ितों के लिए सामुदायिक रसोई और राहत शिविरों का संचालन लगातार जारी रखा जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

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