कोसी-मेची परियोजना के नहर निर्माण से उड़ रही धूल, ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर खतरा
सुपौल, 11 अक्टूबर (हि.स.)। कोसी-मेची परियोजना के तहत नहर निर्माण कार्य के दौरान उड़ रही धूल-मिट्टी से आसपास के ग्रामीण इलाकों में प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होने का मामला सामने आया है। छातापुर प्रखंड की ठूठी पंचायत सहित आसपास के प्रभावित क्षेत्रों में धूल के बढ़ते गुबार से ग्रामीणों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
इस समस्या को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. आलोक आनंद ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पटना के अध्यक्ष को 10 अक्टूबर 2026 को आवेदन भेजकर मामले की जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि बलुआ साइड से आगे नहर निर्माण स्थल के आसपास निर्माण कार्य के दौरान काफी धूल उड़ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण स्थल पर नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। इसके कारण धूल का गुबार आसपास के घरों और खेतों तक पहुंच रहा है। इससे स्थानीय लोगों को रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों को आशंका है कि लंबे समय तक इस तरह की स्थिति बनी रहने से क्षेत्र में वायु प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो सकती है।
निर्माण कार्य से उड़ रही धूल को लेकर स्थानीय लोगों ने बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई है। धूल के लगातार संपर्क में रहने से आंखों में जलन, एलर्जी और सांस संबंधी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान धूल नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम किए जाने चाहिए, ताकि विकास कार्य के कारण आसपास के लोगों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।
डॉ. आलोक आनंद ने कहा कि वे कोसी-मेची परियोजना जैसी महत्वपूर्ण विकास योजना के विरोधी नहीं हैं। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परियोजना का निर्माण कार्य सुचारू रूप से पूरा हो और इसके साथ पर्यावरण संरक्षण तथा आम लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य के दौरान निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन करना और धूल को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी उपाय अपनाना जरूरी है।
आवेदन के माध्यम से बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्रभावित क्षेत्रों में विभागीय टीम भेजकर स्थिति की जांच कराने और नहर निर्माण स्थल का निरीक्षण करने का अनुरोध किया गया है। साथ ही निर्माण कार्य के दौरान नियमित रूप से पानी का छिड़काव सुनिश्चित कराने और धूल के प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक उपाय लागू कराने की मांग की गई है।
डॉ. आलोक आनंद ने यह भी मांग की है कि यदि जांच के दौरान पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इसके अलावा प्रभावित ग्रामीणों को तत्काल राहत देने, भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दीर्घकालीन उपाय करने तथा जांच एवं कार्रवाई की रिपोर्ट शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
अब ग्रामीणों की नजर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संभावित जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग मामले को गंभीरता से लेते हुए धूल नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाएगा, ताकि परियोजना का निर्माण कार्य भी जारी रहे और ग्रामीणों को स्वच्छ वातावरण मिल सके।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

