हर्षिता आत्महत्या मामले में फिर गरमाया किशनगंज, कोर्ट में पहुंची पुनरीक्षण याचिका

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हर्षिता आत्महत्या मामले में फिर गरमाया किशनगंज, कोर्ट में पहुंची पुनरीक्षण याचिका


हर्षिता आत्महत्या मामले में फिर गरमाया किशनगंज, कोर्ट में पहुंची पुनरीक्षण याचिका


किशनगंज, 29 अगस्त (हि.स.)। वर्ष 2019 में सीबीएसई बाल मंदिर स्कूल की 11वीं कक्षा की छात्रा हर्षिता कुमारी की आत्महत्या का बहुचर्चित मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। मामले को लेकर मृतका के पिता आशीष गुप्ता ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 438 और 440 के तहत आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की है।क्रिमिनल रिवीजन एप्लीकेशन संख्या 23/2026 पर 28 अगस्त को पहली सुनवाई हुई। अधिवक्ता अभिनव आलोक के माध्यम से दायर याचिका में बिहार सरकार सहित गोबिंद बिहानी, सपन दास, त्रिलोक चंद जैन, गौरी शंकर अग्रवाल, राज करण दफ्तरी और तत्कालीन वाइस प्रिंसिपल संजय साह को प्रतिवादी बनाया गया है।

अदालत में पहली सुनवाई के दौरान आवश्यक प्रपत्र दाखिल करने और प्रतिवादियों की उपस्थिति से संबंधित कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को होगी। मामला मई 2019 का है। मृतका के पिता का आरोप है कि हर्षिता को परीक्षा में फेल किया गया था तथा स्कूल के तत्कालीन सचिव गोविंद बिहानी द्वारा उसे पास कराने के लिए पैसों की मांग की गई थी। आरोप है कि आत्महत्या से पहले छात्रा को डांटा भी गया था। मानसिक दबाव और अपमान से आहत होकर हर्षिता ट्यूशन जाने की बात कहकर घर से निकली और ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद किशनगंज थाना कांड संख्या 215/19 दर्ज किया गया, जिसमें गोविंद बिहानी आरोपी हैं और मामला न्यायालय में विचाराधीन बताया गया है। घटना के बाद तत्कालीन डीएम द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने मामले की जांच की थी। जांच के बाद तत्कालीन सचिव गोविंद बिहानी और वाइस प्रिंसिपल संजय साह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें स्कूल से हटाया गया था। मामले में एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सामने आई थी, जिसमें परीक्षा कॉपी और छात्रा के परिणाम को लेकर बातचीत का दावा किया गया था। इधर, बाल मंदिर ट्रस्ट के एक ट्रस्टी गौरी शंकर अग्रवाल के इस्तीफे की पेशकश से संबंधित पत्र शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। ट्रस्टियों के बीच आपसी सामंजस्य को लेकर भी चर्चा है। हालांकि, पत्र और उससे जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के रुख पर सभी की नजरें टिकी हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह

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