केजीबीवी में सुविधाओं का अभाव, निरीक्षण में खुलीं व्यवस्थाओं की पोल; डीईओ ने दिए सुधार के सख्त निर्देश

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केजीबीवी में सुविधाओं का अभाव, निरीक्षण में खुलीं व्यवस्थाओं की पोल; डीईओ ने दिए सुधार के सख्त निर्देश


केजीबीवी में सुविधाओं का अभाव, निरीक्षण में खुलीं व्यवस्थाओं की पोल; डीईओ ने दिए सुधार के सख्त निर्देश


सुपौल, 20 जून (हि.स.)। जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में अध्ययनरत छात्राओं को अब भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसका खुलासा शुक्रवार को उस समय हुआ जब जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) संग्राम सिंह ने सरायगढ़ स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय (टाइप-1) का औचक निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान विद्यालय और छात्रावास की व्यवस्था में कई गंभीर कमियां सामने आईं, जिसके बाद डीईओ ने जिले के सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (बीईओ) को केजीबीवी की स्थिति में शीघ्र सुधार लाने का निर्देश दिया।

निरीक्षण के दौरान पाया गया कि विद्यालय में नामांकित छात्राओं की तुलना में छात्रावास में उपस्थित छात्राओं की संख्या काफी कम थी। इसके अलावा परिसर, चापाकल और शौचालयों में साफ-सफाई का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। विद्यालय में रखे पंजी और अन्य अभिलेखों के संधारण में भी कई त्रुटियां पाई गईं।

डीईओ ने इन कमियों पर नाराजगी जताते हुए संबंधित कर्मियों को आवश्यक सुधार करने का निर्देश दिया। खाने-पीने की व्यवस्था की जांच के दौरान भी कई खामियां सामने आईं। रसोईघर में रखी सामग्री अव्यवस्थित पाई गई। उपयोग में लाया जा रहा आटा गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं था और उसके बोरे पर किसी प्रकार का ब्रांड या पहचान चिह्न भी नहीं मिला। इससे खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं छात्राओं के शयन कक्षों में भी साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई।

डीईओ संग्राम सिंह ने विद्यालय की वार्डन बेबी कुमारी को छात्राओं की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा सभी बुनियादी सुविधाओं को एक सप्ताह के भीतर दुरुस्त करने का निर्देश दिया।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्धारित अवधि में स्थिति में सुधार नहीं होने पर वार्डन सहित संबंधित कर्मियों के विरुद्ध विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की स्थापना शैक्षिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों की वंचित एवं कमजोर वर्ग की बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है। यहां छात्राओं को निःशुल्क शिक्षा, भोजन, आवास और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। बावजूद इसके, जिले के कई केजीबीवी में भोजन, स्वच्छता और रखरखाव से जुड़ी शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।

हाल के वर्षों में विद्यालयों में कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर अनुसेवकों और रसोइयों की नियुक्ति भी की गई है। इसके बावजूद व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है।

ऐसे में डीईओ का यह निरीक्षण एक बार फिर विद्यालयों की जमीनी हकीकत को सामने लाया है और अब देखना होगा कि विभागीय निर्देशों के बाद हालात में कितना सुधार हो पाता है।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

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