जेपीयू के छात्र पोर्टल से लॉगिन कर सुधार सकते हैं अपने नाम और जन्मतिथि में गलतियों को

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जेपीयू के छात्र पोर्टल से लॉगिन कर सुधार सकते हैं अपने नाम और जन्मतिथि में गलतियों को


जेपीयू के छात्र पोर्टल से लॉगिन कर सुधार सकते हैं अपने नाम और जन्मतिथि में गलतियों को


सारण, 14 मई (हि.स.)। जयप्रकाश विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल और प्रशासनिक व्यवस्था में इन दिनों एक बदलाव दिखाई दे रही है। कुलपति प्रो परमेंद्र कुमार बाजपेई के निर्देशन में विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा विभाग की कार्यशैली में परिवर्तन किए हैं। यह बदलाव न केवल सत्रों को नियमित करने की दिशा में बेहतर साबित हो रहे हैं, बल्कि प्रोविजनल सर्टिफिकेट, डिग्री और अंकपत्रों से जुड़ी समस्याओं के समाधान को भी पारदर्शी और समयबद्ध बना दिया गया है।

विश्वविद्यालय द्वारा उठाए गए कदमों के तहत अब महाविद्यालयों और स्नातकोत्तर विभागों में प्राचार्य एवं विभागाध्यक्षों द्वारा नामित समन्वयकों की नियुक्ति की गई है। इन समन्वयकों को विश्वविद्यालय द्वारा विशेष लॉगिन आईडी और पासवर्ड प्रदान किए गए हैं।

अब आंतरिक और प्रायोगिक परीक्षाओं के अंक प्रतिदिन सीधे विश्वविद्यालय के पोर्टल पर अपलोड किए जा रहे हैं। इस डिजिटल पहल से परिणाम घोषित होने में होने वाली देरी और अंकों के हेरफेर की संभावना पूरी तरह समाप्त हो गई है।

अंकपत्रों में होने वाली त्रुटियों को लेकर छात्रों की पुरानी शिकायतों का संज्ञान लेते हुए विश्वविद्यालय ने प्राप्त सभी आवेदनों का निष्पादन कर दिया है। परीक्षा नियंत्रक डॉ अशोक कुमार मिश्रा ने बताया कि यदि अभी भी महाविद्यालय या विभाग स्तर पर कोई आवेदन लंबित है तो उसके लिए 30 मई 2026 तक की विशेष तिथि निर्धारित की गई है। इस अवधि के दौरान महाविद्यालय अपने अधिकृत कर्मियों के माध्यम से दस्तावेज भेजकर लंबित मामलों का त्वरित निपटारा करा सकते हैं। परीक्षा फॉर्म भरते समय होने वाली मानवीय भूलों, जैसे नाम, पिता का नाम या जन्मतिथि में गलती को सुधारने के लिए अब छात्रों को कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने होंगे।

विश्वविद्यालय ने पोर्टल पर ऐसी सुविधा दी है कि छात्र स्वयं लॉगिन कर अपनी प्रविष्टियों में सुधार कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, मूल्यांकन केंद्रों पर भी अंकपत्र समन्वयकों की तैनाती की गई है, जो कॉपियों की जांच के साथ-साथ अंकों को पोर्टल पर अपडेट करेंगे।

परीक्षा नियंत्रक डॉ अशोक कुमार मिश्रा ने स्पष्ट किया कि इन नई सुविधाओं के लागू होने से अब विद्यार्थियों को छोटे-मोटे कार्यों के लिए विश्वविद्यालय मुख्यालय आने की आवश्यकता नहीं है।

छात्र अपने संबंधित महाविद्यालय या विभाग में आवेदन देकर अपना कार्य सुगमता से करा सकते हैं। उन्होंने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित इस पारदर्शी व्यवस्था का लाभ उठाएं और व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में सहयोग करें।

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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय कुमार

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