नीतीश कुमार ने आपदा प्रबंधन के लिए बनाया था एसओपी, राजद शासन में राहत के नाम पर होती थी लूट-खसोट: उमेश सिंह कुशवाहा

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नीतीश कुमार ने आपदा प्रबंधन के लिए बनाया था एसओपी, राजद शासन में राहत के नाम पर होती थी लूट-खसोट: उमेश सिंह कुशवाहा


पटना, 20 सितंबर (हि.स.)। बिहार जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने रविवार को बयान जारी कर कहा कि नीतीश कुमार शुरू से कहते रहे हैं कि सरकारी खजाने पर पहला अधिकार आपदा पीड़ितों का है। वर्ष 2005 में सत्ता संभालने के बाद नीतीश कुमार ने आपदा प्रबंधन विभाग का गठन किया, ताकि आपदा से जुड़़े सभी कार्यों का बेहतर समन्वय हो सके।

उन्हाेंने कहा

वर्ष 2010 में विभिन्न आपदाओं से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (स्टैंडड ऑपरेटिंग प्राेसिडियाेर (एसओपी ) का सूत्रण किया गया, जिसमें बाढ़़ एवं सुखाड़ की पूर्व तैयारियों, राहत एवं बचाव तथा बाढ़़ एवं सुखाड़ के बाद की जाने वाली कार्रवाइयों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। इसी सोच और नीति के तहत एनडीए सरकार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पूरी तत्परता के साथ राहत एवं बचाव अभियान चला रही है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि तेजस्वी यादव मीडिया में चेहरा चमकाने के लिए तथ्यों से परे अनाप-शनाप बयानबाजी करते हैं और जनता को भ्रमित करने की कोशिश करते रहते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि राज्य सरकार द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कुल 12 बाढ़ राहत शिविरों एवं 1,260 सामुदायिक रसोइयों का संचालन किया गया है।

करीब 4 लाख से अधिक पाॅलिथीन शीट एवं 90 हजार से अधिक सूखा राशन के पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। वहीं, 17 हजार क्विंटल से अधिक पशुचारा भी वितरित किया गया है। उन्हाेंने कहा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 1,600 से अधिक

नावों का संचालन किया गया है। त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 27 एसडीआरएफ और 10 एनडीआरएफ की टीमें भी पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात हैं।

कुशवाहा ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चाैधरी ने 8 लाख से अधिक बाढ़ प्रभावित परिवारों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 7 हजार रुपये की सहायता राशि भेजी है। स्वास्थ्य मंत्री के नेतृत्व में राहत शिविरों में मेडिकल टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ काम कर रही हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चैधरी एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चाैधरी लगातार बाढ़ की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि तेजस्वी यादव के माता-पिता के शासनकाल में बाढ़ पीड़ि़तों को भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता था। आपदा राहत के नाम पर उस दौर में हुई लूट-खसोट के किस्से आज भी बिहार की जनता के बीच चर्चा में हैं। बाढ़़ राहत घोटाले की खबरें देशभर के अखबारों की सुर्खियां बनती थीं और बाढ़ पीड़ि़तों की सुध लेने वाला कोई नहीं था। इसलिए तेजस्वी यादव को अनर्गल बयानबाजी करने के बजाय अपने अतीत के आईने में झांकना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / चंदा कुमारी

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