अनर्गल आरोपों के सहारे अपनी डूबती राजनीतिक साख बचाने की कोशिश में तेजस्वी: उमेश सिंह कुशवाहा

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अनर्गल आरोपों के सहारे अपनी डूबती राजनीतिक साख बचाने की कोशिश में तेजस्वी: उमेश सिंह कुशवाहा


पटना, 30 अप्रैल (हि.स.)। बिहार जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने गुरुवार को बयान जारी कर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राजद की सियासी जमीन लगातार सिकुड़ती जा रही है और जनता के बीच उसकी राजनीतिक विश्वसनीयता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। ऐसे में राजद के युवराज तेजस्वी यादव अनर्गल और तथ्यहीन आरोपों के सहारे अपनी डूबती राजनीतिक साख को बचाने की असफल कोशिश में लगे हैं, जो उनकी गहरी राजनीतिक हताशा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

प्रदेश अध्यक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि तेजस्वी यादव का राजनीतिक आचरण अब एक बेचैन आत्मा का परिचायक बन चुका है। गत विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद वे अब तक उससे उबर नहीं पाए हैं। मात्र 25 सीटों पर सिमटने के राजनीतिक अवसाद का प्रभाव उनके बौखलाहट भरे और असंतुलित बयानों में साफ झलकता है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि लालू-राबड़़ी के शासनकाल में बिहार भ्रष्टाचार, कुशासन, जंगलराज, सत्ता-पोषित अपराध, अपहरण उद्योग, जातीय हिंसा, चरवाहा विद्यालय और चैपट कानून-व्यवस्था का प्रतीक बन गया था। उस दौर में बिहार की पहचान गहरे संकट में थी, लोग स्वयं को बिहारी कहने में भी अपमानित महसूस करते थे।

किन्तु वर्ष 2005 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनने के बाद बिहार ने उस अंधकारमय और कुशासन के दौर से बाहर निकलकर विकास और सुशासन की राह पकड़़ी। आज स्थिति यह है कि स्वयं को बिहारी कहलाना अपमान नहीं, बल्कि स्वाभिमान और सम्मान का प्रतीक बन चुका है। चूंकि तेजस्वी यादव की राजनीति ही नकारात्मकता, असत्य, दुष्प्रचार और बेबुनियाद आरोपों पर आधारित है, इसलिए उन्हें बिहार में हुए परिवर्तन दिखाई नहीं देते।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बिहार के इस परिवर्तन को नकारना केवल राजनीतिक हताशा को दर्शाता है। किन्तु, बिहार की जनता अब पूरी तरह जागरूक और सजग है तथा एनडीए की सुशासन और विकास की राजनीति के साथ मजबूती से खड़़ी है। ऐसे में तेजस्वी यादव द्वारा झूठ और भ्रम फैलाने के प्रयासों का कोई प्रभाव पड़़ने वाला नहीं है।

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हिन्दुस्थान समाचार / चंदा कुमारी

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