बिहार के लोगों को अपने बच्चों की चिंता नहीं तो क्या करेंगे मोदी, नीतीश और लालू जी, बिहार की बदहाली पर बोले प्रशांत किशोर

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बिहार के लोगों को अपने बच्चों की चिंता नहीं तो क्या करेंगे मोदी, नीतीश और लालू जी, बिहार की बदहाली पर बोले प्रशांत किशोर


बिहार के लोगों को अपने बच्चों की चिंता नहीं तो क्या करेंगे मोदी, नीतीश और लालू जी, बिहार की बदहाली पर बोले प्रशांत किशोर


सुपौल, 14 अप्रैल (हि.स.)। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर सोमवार को सुपौल जिले के यात्रा के दौरान रात्रि विश्राम में बुद्धिजीवियों के साथ बिहार नवनिर्माण अभियान के विषय पर चर्चा की।

कार्यक्रम में सूत्रधार प्रशांत किशोर के साथ पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना, बिहार प्रदेश ओबीसी मंच अध्यक्ष सह सेवानिवृत आयुक्त भारतीय प्रशासनिक सेवा ललन कुमार यादव, पूर्व अपर पुलिस महा निदेशक जय प्रकाश सिंह ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। शहर के विद्यापूरी स्थित जन सुराज नेता सह आरटीआई कार्यकर्त्ता अनिल कुमार सिंह के आवास पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें 200 से शहर के बुद्धिजीवियों वर्ग के लोग शामिल हुए। हाल के राजनीतिक स्थिति पर सवालों को लेकर ने कहा कि बिहार सिर्फ मजदूरों की फैक्ट्री बनकर रह जाएगी। इससे यह साबित हो गया कि अब बिहार केंद्र के इशारे पर चलेगा।

चुनाव को करीब छह महीने खत्म हो गए लेकिन क्या सरकार ने अपना वादा पूरा किया? कितनी नौकरियां मिली और मिलेगी भी नहीं। क्यूंकि बिहार के खजाने में कुछ है ही नहीं। जितनी नौकरियां है उनको भी वेतन मिलना मुश्किल हो रहा है। अब नए सीएम के बनने के बाद बिहार मजदूर एक्सपोर्ट्स में अपनी बड़ी भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम के दौरान कई लोगों ने विधानसभा में पार्टी की हार और आगे की रणनीति को लेकर भी कई सवाल किए। इसको लेकर प्रशांत किशोर ने कहा कि राजनीति में सफलता पाने के लिए धैर्य और निरंतरता सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं।

उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि एक चुनाव के परिणाम से किसी आंदोलन या विचारधारा की ताकत का आकलन नहीं किया जा सकता। जन सुराज को मिले 16 लाख वोट कोई छोटी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि बड़ी संख्या में लोग बदलाव की सोच के साथ खड़े हैं।

उन्होंने इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि महात्मा गांधी का कोई भी आंदोलन छोटा नहीं था, लेकिन उन्हें भी लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा। उसी तरह जवाहरलाल नेहरू ने देश की आजादी के लिए वर्षों तक जेल में रहकर संघर्ष किया।

इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि बड़े बदलाव रातों-रात नहीं आते, बल्कि इसके लिए लगातार मेहनत, त्याग और धैर्य की आवश्यकता होती है। प्रशांत किशोर ने आगे बताया कि चुनाव परिणाम के बाद जन सुराज के नेताओं ने पश्चिम चंपारण स्थित गांधी भितिहरवा आश्रम में एक दिन का उपवास रखा था। यह उपवास केवल प्रतीकात्मक नहीं था, बल्कि आत्ममंथन और आगे की रणनीति तय करने का एक माध्यम था। उसी दौरान जन सुराज की ओर से यह घोषणा की गई थी कि बिहार में बनी नई सरकार को अपने चुनावी वादों को पूरा करने के लिए छह महीने का समय दिया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

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