जैन मुनि के फारबिसगंज आगमन पर तेरापंथ समाज ने किया स्वागत
अररिया, 24 मई(हि.स.)।
फारबिसगंज तेरापंथ भवन में रविवार को जैन मुनि प्रशांत कुमार एवं कुमुद कुमार का आगमन हुआ।जहां तेरापंथ समाज के द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया।
जैन तेरापंथ धर्म संघ में साधु सतियों का सावन से लेकर कार्तिक मास तक चार महीने का चातुर्मास काल रहता है। इन चार महीनों के पश्चात गुरु इंगित आगामी चातुर्मास को नजर में रखते हुए साधु और साध्वी आसपास के क्षेत्र में विचरण करते हैं।इसी क्रम में आचार्य श्री महाश्रमणजी के विद्वान एवं ज्ञानी संत मुनि प्रशांत कुमार एवं कुमुद कुमार का असम के सिलचर से आज 49 वां पडाव फारबिसगंज में हुआ।
मुनि द्वय भारत के कई क्षेत्रों की यात्रा करते हुए पिछले चातुर्मास स्थल सिलचर से असम,बंगाल ,बिहार,नेपाल एवं सीमावर्ती क्षेत्रों की यात्रा करते हुए फारबिसगंज में अल्पकालीन प्रवास के लिए तेरापंथ भवन पहुंचे।बथनाहा से फारबिसगंज जुलूस की शक्ल में मुनि द्वय पहुंचे।
मौके पर आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत में सभाध्यक्ष महेंद्र बैद ने मुनिश्री का स्वागत करते हुए लाडनूं में सभा द्वारा संचालित अपना चौका के लिए आभार प्रकट किया।महिला मंडल की अध्यक्ष समता दुगड़ ने महिला मंडल की तरफ से मुनिश्री का स्वागत एवं अभिनंदन किया। महिला मंडल की बहनों ने स्वागत गीतिका गाकर अपनी भावों को मुनि के सामने प्रस्तुत किया। तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष आशीष गोलछा और सभा के मंत्री मनोज भंसाली ने दोनों संतों का जीवन परिचय दिया। ज्ञानशाला के बच्चों के द्वारा एक सुंदर प्रस्तुति प्रस्तुत की गई। नीलम बोथरा ने अपनी भावों की प्रस्तुति गीतिका के माध्यम से दी।
मुनि श्री कुमुद कुमार जी ने अपने वक्तव्य में समय के महत्त्व को बताया।उन्होंने कहा कि अगर हम दिन के 24 घंटे में दो-दो मिनट भी निकाल लेते हैं तो एक काल मुहूर्त 48 मिनट का समय,सामयिक के रूप में निकल सकता है।साथ ही साथ सभा के द्वारा संचालित किया जा रहे लाडनूं में अपना चौका के लिए फारबिसगंज क्षेत्र को साधुवाद दिया कि उन्होंने साधु संतों की प्रेरणा को ग्रहण करते हुए तुरंत क्रियान्वित भी किया। मुनिश्री ने सभी श्रद्धालु जनों को प्रेरणा देते हुए कहा कि आंखें सिर्फ देखने का कार्य करती है लेकिन इसके साथ-साथ दो पलके भी है जिसका यह संदेश है कि हमें देखने के साथ-साथ कुछ बातों को नजर अंदाज भी करते जाना चाहिए।
मुनि श्री प्रशांत कुमार जी ने फारबिसगंज को बिहार का महत्वपूर्ण क्षेत्र बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र अपने आप में विशिष्ट इसलिए भी हो जाता है क्योंकि यहां गुरु की दृष्टि एक बार नहीं बल्कि तीन-तीन बार पड़ी है।आज के समय में जहां ऐसे कई क्षेत्र भी हैं जहां गुरुचरण पड़े नहीं है लेकिन किसी भूमि पर तीन-तीन बार गुरु का आना अपने आप में बहुत बड़े सौभाग्य की बात होती है। फारबिसगंज क्षेत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके नाम में चौबीस तीर्थंकरों की भूमि का भी समागम हो जाता है।
कार्यक्रम में श्रावक श्राविकाओं की अच्छी उपस्थिति दर्ज की गई। सभा, तेरापंथ युवक परिषद ,महिला मंडल, कन्या मंडल एवं ज्ञानशाला के बच्चों के सहित समाज के अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार ठाकुर

