बेटों से अंतिम मुलाकात के लिए जेल गेट पर पहुंची मां की अर्थी
भागलपुर, 02 मार्च (हि.स.)। बीते एक साल से एनडीपीएस मामले में कैंप जेल बंद दो सगे भाइयों को सोमवार को घंटो उसकी मृत मां से मिलने नहीं दिया गया। इसके बाद परिजन ने जेल गेट के सामने जेल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। जब उन्हें खबर मिली कि उनकी मां अब इस दुनिया में नहीं रहीं।
मां की अंतिम इच्छा थी कि वह अपने बेटों को आखिरी बार देख ले, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। मां की मौत के बाद परिजन उनकी अर्थी लेकर सीधे जेल गेट पहुंच गए, ताकि बेटों को अंतिम दर्शन कराया जा सके। बबरगंज थाना क्षेत्र के शिवलोक कॉलोनी, मोहद्दीनगर निवासी पुरुषोत्तम कुमार और रवि कुमार एनडीपीएस मामले में बीते एक वर्ष से जेल में बंद हैं। उनकी मां का निधन हो गया।
परिजन ने तुरंत जेल प्रशासन से संपर्क साधा, लेकिन कोर्ट की प्रक्रिया का हवाला देते हुए अगली सुबह तक इंतजार करने को कहा गया। इसी बीच परिजन मां की अर्थी लेकर परिजन जेल गेट पहुंच गए और बेटों से अंतिम मुलाकात की गुहार लगाने लगे। घंटों तक गेट पर इंतजार होता रहा।
परिजन का आरोप है कि पहले अनुमति नहीं दी गई और अगली सुबह आने को कहा गया। इस दौरान गेट पर माहौल भावुक और तनावपूर्ण हो गया। परिजन ने जेल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अंततः जेलर प्रकाश सिंह मौके पर पहुंचे। मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए उन्होंने विशेष अनुमति देते हुए अर्थी को जेल गेट के भीतर ले जाने की स्वीकृति दी। इसके बाद दोनों बेटों को मां के अंतिम दर्शन कराए गए। जेल गेट के भीतर का वह दृश्य बेहद मार्मिक था।
बेटों ने बिलखते हुए अपनी मां को अंतिम विदाई दी। मृतका की बहन पुष्पा ने बताया कि हमलोग सुबह से ही आग्रह कर रहे थे, लेकिन प्रक्रिया का हवाला दिया जा रहा था। मां की अंतिम इच्छा थी कि बेटों को देख ले, इसलिए हम अर्थी लेकर ही जेल पहुंच गए। वहीं मृतका के पिता ने कहा कि घंटों इंतजार के बाद आखिरकार प्रशासन ने मानवीय आधार पर अनुमति दी। इसके लिए हम जेलर साहब का आभार जताते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

