एचआईवी मरीज के ब्लड सैंपल से भी ‘परहेज’, पिता-पुत्र दिनभर भटकते रहे
सीवान, 10 सितंबर (हि.स.)।
प्रतिनिधि, सीवान। सदर अस्पताल में एचआईवी रिएक्टिव गर्भवती महिला के साथ कथित भेदभाव का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब एचआईवी रिएक्टिव पिता और उसके चार वर्षीय पुत्र के साथ जांच को लेकर कथित भेदभाव का मामला सामने आया है।
गुरुवार को बेस लाइन टेस्ट कराने पहुंचे पिता-पुत्र को ब्लड सैंपल के लिए दिनभर अस्पताल में भटकना पड़ा। आरोप है कि पैथोलॉजी विभाग के कर्मचारियों ने जांच करने की बात तो कही, लेकिन ब्लड सैंपल निकालने से इनकार कर दिया।
जामो बाजार निवासी युवक ने बताया कि वह गुरुवार की सुबह अपने चार वर्षीय पुत्र को लेकर सदर अस्पताल पहुंचा था । पिता और बच्चे का बेस लाइन टेस्ट कराया जाना था। पैथोलॉजी विभाग में पहुंचने पर कर्मचारियों ने कहा कि ब्लड का सैंपल वे नहीं निकालेंगे।
एआरटी या आईसीटीसी से सैंपल निकलवाकर लाने को कहा गया। युवक का कहना है कि वह सुबह से बच्चे को लेकर अस्पताल में मौजूद रहा। बच्चा लगातार रोता रहा, लेकिन सैंपल लेने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।
मामले की जानकारी मिलने पर शाम करीब साढ़े चार बजे सदर अस्पताल के एक अधिकारी ने हस्तक्षेप करते हुए पैथोलॉजी कर्मियों से ब्लड सैंपल लेने का अनुरोध किया। इसके बावजूद युवक को तत्काल राहत नहीं मिली। आरोप है कि कर्मचारियों ने कहा कि यहां सैंपल नहीं निकाला जाता है और सबसे अंत में सैंपल लिया जायेगा। शाम करीब सवा पांच बजे तक पिता और उसके पुत्र का बेस लाइन टेस्ट के लिए ब्लड सैंपल नहीं लिया गया था।
बेस लाइन टेस्ट एआरटी उपचार शुरू करने से पहले एचआईवी रिएक्टिव मरीज के चिकित्सकीय मूल्यांकन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में सरकारी अस्पताल में सैंपल के लिए मरीज को घंटों भटकना पड़े तो व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बताया जाता है कि ऐसी परेशानियों के कारण कई नए एचआईवी रिएक्टिव मरीज बेस लाइन जांच निजी पैथोलॉजी केंद्रों में कराने को मजबूर होते हैं. निजी जांच का खर्च गरीब मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है। एक तरफ सरकार एचआईवी मरीजों को मुफ्त एआरटी और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर सदर अस्पताल में सैंपल लेने को लेकर इस तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं।
कुछ दिन पहले एचआईवी रिएक्टिव गर्भवती महिला के मामले में भी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। अब पिता-पुत्र के मामले ने व्यवस्था की संवेदनशीलता पर फिर सवाल खड़े कर दिये हैं। सवाल यह है कि यदि एचआईवी रिएक्टिव मरीजों के लिए सरकारी अस्पताल में जांच की सुविधा उपलब्ध है, तो सैंपल लेने के लिए मरीज को सुबह से शाम तक क्यों भटकना पड़ रहा है?
क्या कहते हैं जिम्मेदार
जानकारी होने पर एआरटी काउंसेलर से कहा गया है कि मदद कर ब्लड का सैंपल निकलवाने में सहयोग करें. शुक्रवार को इस संबंध में अधीक्षक से बात की जायेगी.
डॉ. अशोक कुमार, जिला एड्स नियंत्रण पदाधिकारी, सीवान
हिन्दुस्थान समाचार / Amar Nath Sharma

