सरस्वती विद्या मंदिर में मनाया गया गुरु पूर्णिमा उत्सव
अररिया 29 जुलाई(हि.स.)। फारबिसगंज के श्री रानी सरस्वती विद्या मंदिर में बुधवार को गुरु पूर्णिमा उत्सव श्रद्धा,भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि वेदव्यास के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन एवं पुष्पार्चन कर किया गया। इसके उपरांत विद्यालय परिवार द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार एवं गुरु वंदना प्रस्तुत कर भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की गई।
इस अवसर पर शिशु मंदिर खंड के प्रधानाचार्य रामनरेश सिंह ने गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु ही ज्ञान, संस्कार और चरित्र निर्माण के माध्यम से व्यक्ति के जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, अनुशासन एवं समर्पण का भाव बनाए रखने का आह्वान किया।
विद्यालय के आचार्य श्रीप्रसाद राय ने महर्षि वेदव्यास के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि वेदव्यास ने वेदों का संकलन, महाभारत तथा अठारह पुराणों की रचना कर भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध किया। इसी महान योगदान के कारण उन्हें आदिगुरु के रूप में सम्मानपूर्वक स्मरण किया जाता है।
आचार्य लक्ष्मीकांत झा ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का प्रथम गुरु उसके माता-पिता होते हैं। उनके पश्चात शिक्षक जीवन को ज्ञान, संस्कार और नैतिक मूल्यों से आलोकित करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से माता-पिता, गुरुजनों तथा अपने से बड़े सभी लोगों का सदैव आदर एवं सम्मान करने का संदेश दिया।
इस अवसर पर विद्यालय के समस्त आचार्यगण एवं भैया-बहनों की सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार ठाकुर

