मैथिली साहित्य में 'श्री राधा' पुस्तक का भव्य लोकार्पण
दरभंगा, 26 जून (हि.स.)। महराजा लक्षमेंश्वर सिंह महाविद्यालय (एमएलएसएम) परिसर में शुक्रवार को डॉ दीर्घनारायण कुमर द्वारा लिखित पुस्तक 'मैथिली साहित्य में श्री राधा' का भव्य लोकार्पण कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ लक्ष्मी निवास पांडे के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ।
इस अवसर पर साहित्य, शिक्षा एवं न्याय जगत से जुड़े अनेक विद्वानों और गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही। लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. लक्ष्मी निवास पांडे ने कहा कि शरणागत होने से ही जीवन दोषमुक्त होता है और राधा तत्व में नारायण भाव से डूबकर ही यह संभव है। उन्होंने कहा कि लेखक ने भक्ति रस में पूर्णतः निमग्न होकर इस कृति की रचना की है, जो मैथिली साहित्य के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगी।
कार्यक्रम का शुभारंभ तेजस्विनी एवं तेजस ठाकुर द्वारा प्रस्तुत भगवती वंदना से हुआ। मनीष कुमार ने पुस्तक एवं लेखक का परिचय दिया, जबकि हृदय कुमार झा ने लेखक को सौम्य, शांत, गंभीर एवं धीर व्यक्तित्व का साहित्यकार बताया। पुस्तक में मिथिला की साहित्यिक परंपरा तथा लाल दास, मधुप, मोदलता एवं बाबा विद्यापति की रचनाओं में राधा तत्व के स्वरूप का विस्तृत विवेचन किया गया है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. दिलीप कुमार झा ने कहा कि अधिवक्ता एवं लिपिक जैसे व्यस्त पेशे में रहते हुए लेखक की साहित्यिक साधना प्रेरणादायी है। डॉ. मंजर सुलेमान ने इस कृति को सामाजिक समरसता का संदेश देने वाली महत्वपूर्ण रचना बताया।
लेखक डॉ. दीर्घनारायण कुमर ने अपने संबोधन में लेखन यात्रा, वेद, उपनिषद, संहिता एवं देवी भागवत पुराण के संदर्भों का उल्लेख करते हुए अपनी माता के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
इस अवसर पर केवटी विधायक मुरारी मोहन झा, बार एसोसिएशन दरभंगा के सचिव कृष्ण कुमार मिश्रा, अध्यक्षता कर रहे सेवानिवृत्त प्राध्यापक अमरेश झा तथा डॉ. शिशिर कुमार झा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन तरुण कुमार झा ने किया। अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान अमरीश कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन ब्रजधर कुमर 'संटू' ने किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / Krishna Mohan Mishra

