आम जनता को सेवाओं से वंचित करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई : विजय सिन्हा
- प्रधान सचिव का कड़ा पत्र-अवैध सामूहिक अवकाश से सिस्टम ठप, डीएम-आयुक्तों को एक्शन मोड में आने का आदेश
हड़ताली राजस्व कर्मियों को सरकार की दो टूक: आर्थिक न्याय से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, 4.5 करोड़ जमाबंदीदारों का काम हर हाल में होगा
पटना, 13 अप्रैल (हि.स.)। बिहार में राजस्व कर्मियों की लंबी हड़ताल पर सरकार ने अब निर्णायक तेवर दिखा दिए हैं। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ चेतावनी दी है कि आर्थिक न्याय से किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा और आम जनता को सेवाओं से वंचित करने वालों पर सख्त कार्रवाई तय है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता अंतिम व्यक्ति तक राजस्व सेवाएं पहुंचाना है और यदि कहीं भी अवरोध, लापरवाही या जानबूझकर काम रोका गया तो संबंधित कर्मियों पर नियमों के तहत कठोर कार्रवाई होगी।
इस बीच राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को कड़ा पत्र जारी कर साफ कर दिया है कि दो महीने से चल रहा सामूहिक अवकाश अवैध है और इससे पूरे प्रशासनिक ढांचे में स्टेलमेट की स्थिति बन गई है।
हड़ताल ने रोका आर्थिक न्याय का रास्ता
पत्र में कहा गया है कि 4.5 करोड़ जमाबंदीदारों को सरल, पारदर्शी और बिना रिश्वत सेवाएं देना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन जमीनी स्तर पर हड़ताल और बिचौलियों के जरिए काम होने से आम लोगों का अधिकार प्रभावित हो रहा है। प्रधान सचिव ने स्पष्ट लिखा कि जब कर्मचारी काम छोड़ देते हैं या दलालों के जरिए सिस्टम चलता है, तो संविधान द्वारा दिया गया न्याय केवल कागजों में सिमट जाता है।
डीएम ही जिम्मेदार, अब कार्रवाई तय
सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि समाहर्ता (डीएम) ही नियुक्ति और अनुशासनिक प्राधिकार हैं, इसलिए वे अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए व्यवस्था बहाल करें। यानी अब जिले स्तर पर सीधे जवाबदेही तय होगी।
डिजिटल डिवाइड को बहाना न बनाएं
पत्र में यह भी माना गया कि डिजिटल डिवाइड के कारण योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पा रहीं, लेकिन इसे लापरवाही का बहाना नहीं बनने दिया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश है कि हर हाल में जमीनी स्तर पर सेवा सुनिश्चित करें।
आर्थिक न्याय पर फोकस
सरकार ने अनुच्छेद 14, 21, 38 और 39 (b)(c) का हवाला देते हुए कहा है कि आर्थिक न्याय कोई नारा नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व है, जिसे जमीन पर उतारना ही प्रशासन की असली परीक्षा है।
मैदान में सरकार, अब सिस्टम की बारी
मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा और उपमुख्यमंत्री की भूमि सुधार जन कल्याण संवाद का जिक्र करते हुए कहा गया है कि सरकार जनता के बीच जाकर संवाद कर रही है, अब प्रशासन को भी उसी गति से काम करना होगा।
काम करो या कार्रवाई झेलो
पत्र के अंत में साफ संकेत है कि अब ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं है। सरकार ने साफ कर दिया है कि आर्थिक न्याय को रोकने वाली हर बाधा हटेगी। चाहे वह हड़ताल हो, लापरवाही हो या सिस्टम के भीतर की मिलीभगत।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ .राजेश

