गैस की कमी ने मजदूरों को घर लौटने पर किया मजबूर

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सुपौल, 08 अप्रैल (हि.स.)। ईरान-अमेरिका और इजरायल युद्ध और गैस की किल्लत का असर अब सीधे गरीब-मजदूरों की जिंदगी पर पड़ने लगा है।

हरियाणा के औद्योगिक इलाकों में काम कर रहे त्रिवेणीगंज क्षेत्र के प्रवासी मजदूरों को रसोई गैस की कमी और महंगाई के कारण अपना काम छोड़कर घर लौटना पड़ रहा है। गोनहा गांव के अजय कुमार चार महीनों से गुड़गांव के एक धागा प्लांट में काम कर रहे थे, जहां मरहम-पट्टी में इस्तेमाल होने वाला गॉज तैयार होता है। लेकिन, अचानक रसोई गैस की किल्लत इतनी बढ़ गई कि खाना बनाना मुश्किल हो गया।

मजबूर होकर उन्हें दो हफ्ते पहले घर लौटना पड़ा।इसी गांव के इंद्रदेव भी हरियाणा के बल्लभगढ़ (फरीदाबाद) में लोहा फैक्ट्री में काम करते थे। वह पांच वर्षों से वहां मशीनों पर काम कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। तीन गुना बढ़ी गैस की कीमत: इंद्रदेव बताते हैं कि आम दिनों में छोटे सिलेंडर में गैस भरवाने के लिए करीब 100 रुपये प्रति किलो खर्च होता था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय तनाव के बाद कीमत 300 से 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई।

दस्तावेजों के अभाव में उन्हें सरकारी गैस कनेक्शन नहीं मिल सका, जिससे वे बाजार से महंगी दर पर गैस खरीदने को मजबूर थे। बढ़ती कीमत और अनिश्चित आपूर्ति ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह प्रभावित कर दिया, और आखिरकार उन्हें काम छोड़कर गांव लौटना पड़ा।

इंद्रदेव कहते हैं कि गांव में रोजगार के अवसर नदारद हैं। ऐसे में अगर हालात नहीं सुधरे तो वे फिर से फरीदाबाद लौटने को मजबूर होंगे। श्रीरामपुर पंचायत के मुखिया संजय सिंह कहते हैं कि अन्य कई गांव में भी प्रवासी मजदूर गैस संकट के कारण लौटे हैं। अगर ऐसे लोग काम मांगते हैं तो उन्हें मनरेगा के तहत जरूर काम उपलब्ध कराया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

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