भागलपुर में गंगा से गाद हटाने की तैयारी, गांगेय डॉल्फिन के आशियाने पर मंडराया संकट

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भागलपुर में गंगा से गाद हटाने की तैयारी, गांगेय डॉल्फिन के आशियाने पर मंडराया संकट


भागलपुर, 22 सितंबर (हि.स.)। इस वर्ष बाढ़ की विभीषिका झेलने के बाद भागलपुर के ध्वस्त तटबंधों के सामने गंगा नदी में जमा बालू और गाद (सिल्ट) को हटाने के लिए ड्रेजिंग की तैयारी शुरू हो गई है। दावा है कि नदी की तलहटी साफ होने से जलप्रवाह बेहतर होगा और बाढ़-कटाव से राहत मिलेगी लेकिन, गंगा जैसी जीवंत नदी में बड़े पैमाने पर ड्रेजिंग केवल एक तकनीकी कवायद नहीं है।

पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस कदम से राष्ट्रीय जलीय जीव गांगेय डॉल्फिन और अन्य जलीय प्रजातियों के पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर संकट मंडरा सकता है।

उल्लेखनीय है कि भागलपुर का सुल्तानगंज से कहलगांव तक का क्षेत्र 'विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभयारण्य' के रूप में संरक्षित है। ड्रेजिंग के कारण नदी के शांत पर्यावरण में भारी मशीनों का शोर गूंजेगा। चूंकि डॉल्फिन देख नहीं सकतीं और दिशा व शिकार के लिए पूरी तरह 'इकोलोकेशन' (ध्वनि तरंगों) पर निर्भर करती हैं, इसलिए मशीनों की तेज आवाज उन्हें भ्रमित और तनावग्रस्त कर देगी। इसके अलावा, तलहटी से गाद निकालने के कारण पानी अत्यधिक मटमैला हो जाएगा, जिससे पानी में ऑक्सीजन का स्तर घटेगा और डॉल्फिन समेत कई मछलियों का दम घुटने लगेगा। नदी की तलहटी में जमा गाद और बालू कई जलीय जीवों और छोटी मछलियों का प्राकृतिक आवास होते हैं, जो डॉल्फिन का मुख्य भोजन हैं। ड्रेजिंग से यह पूरा खाद्य जाल नष्ट हो सकता है।

जानकारों का कहना है कि पूर्व में कहलगांव-पीरपैंती के रानी दियारा में हुए ड्रेजिंग प्रयोग के बाद नदी की धारा बदलने से भारी कटाव हुआ था और ग्रामीणों के विरोध के बाद काम रोकना पड़ा था। नदी अपनी प्रकृति के अनुसार खाली जगह को फिर से भरने की कोशिश करती है, जिससे यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

पर्यावरणविद् दीपक कुमार का सवाल है कि क्या इस ड्रेजिंग को शुरू करने से पहले डॉल्फिन के संरक्षण और नदी की बदलती धारा पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों का पर्याप्त वैज्ञानिक आकलन किया गया है? ड्रेजिंग से तात्कालिक रूप से किसी एक इलाके को बाढ़ से राहत मिल सकती है, लेकिन उचित प्रबंधन के बिना यह दूसरे तटों पर कटाव का नया खतरा पैदा कर सकती है। पर्यावरणविदों की मांग है कि इस कार्य को केवल गाद हटाने तक सीमित न रखकर, डॉल्फिन के अनुकूल एक व्यापक और ईमानदार नदी प्रबंधन योजना के तहत ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

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