सबौर के इंग्लिश गाँव में गंगा का तांडव, रात भर में नदी में समाए आधा दर्जन आशियाने
भागलपुर, 01 सितंबर (हि.स.)। जिले के सबौर प्रखंड के इंग्लिश गाँव में गंगा का कटाव अब स्थानीय लोगों के लिए सिर्फ एक खतरा नहीं, बल्कि उनके जीवन भर के सपनों के उजड़ने की दर्दनाक दास्तान बन चुका है।
सोमवार की देर रात से लेकर मंगलवार की अहले सुबह तक गंगा की तेज धारा ने भयानक कहर बरपाया, जिसमें आधा दर्जन से अधिक पक्के मकान देखते ही देखते नदी में समा गए। किसी की गृहस्थी बही, तो किसी की जीवन भर की जमा-पूंजी गंगा की तेज लहरों की भेंट चढ़ गई। पीड़ित परिवारों के पास अब सिर छिपाने तक की जगह नहीं बची है।
तबाही का मंजर इतना खौफनाक था कि लोग बेबस होकर अपनी आँखों के सामने अपने आशियानों को जमींदोज होते देखते रहे। कटाव के मुहाने पर खड़े भगवान यादव ने खतरे की गंभीरता को देखते हुए आनन-फानन में अपना घर खाली कर दिया है। वहीं, गाँव के मणि भूषण चौबे ने भी अपना पूरा मकान खाली कर लिया है।
गाँव के कई अन्य घर अब भी कटाव के मुहाने पर खड़े हैं, जिससे ग्रामीणों में यह खौफ है कि न जाने अगली सुबह उनका घर बचेगा भी या नहीं। पीड़ित राधे साह ने रुंधे गले से अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, हमारा पूरा घर गंगा में विलीन हो गया।
जब तक परिवार के लोग कुछ समझ पाते और सामान निकालते, तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था। तन पर पहने कपड़ों के अलावा हमारे पास कुछ नहीं बचा। गहने-जेवरात, फ्रिज, टीवी, कपड़े और घर में रखे पैसे सब कुछ गंगा की तेज धारा में बह गए। उल्लेखनीय है कि इंग्लिश गाँव में गंगा का यह रौद्र रूप नया नहीं है। वर्ष 2023 और 2024 में भी यहाँ गंगा ने जमकर तबाही मचाई थी।
तब प्रशासन की ओर से करोड़ों रुपये की लागत से कटावरोधी कार्य कराया गया था। लेकिन आज हालात यह हैं कि वह पूरा का पूरा कटावरोधी ढांचा खुद गंगा में विलीन हो चुका है। ग्रामीण अब इस कार्य की गुणवत्ता और सरकारी दावों पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।
गाँव में मची इस भारी तबाही के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर जल संसाधन विभाग की टीम हरकत में आई है। कटाव को रोकने के लिए युद्धस्तर पर गंगा किनारे बालू से भरी बोरियां (फ्लड फाइटिंग वर्क) डाली जा रही हैं। हालांकि, प्रशासनिक मुस्तैदी के बावजूद स्थानीय ग्रामीण इस व्यवस्था से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं।
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि गंगा की इतनी तेज धारा के सामने महज बालू की बोरियां कुछ घंटों से ज्यादा नहीं टिक पाएंगी। यदि तत्काल प्रभाव से कोई मजबूत और ठोस तकनीकी उपाय नहीं किया गया, तो पूरा इंग्लिश गाँव जल्द ही इतिहास के पन्नों में सिमट जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

