सीवान में ‘सप्तशक्ति संगम’ का गरिमामय समापन
सीवान, 22 फरवरी (हि.स.)।विद्या भारती की उत्तर बिहार प्रांत इकाई, लोक शिक्षा समिति बिहार के सीवान विभाग द्वारा रविवार को विद्या भवन महिला महाविद्यालय परिसर में आयोजित “सप्तशक्ति संगम” का समापन समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में शहर की बड़ी संख्या में मातृशक्ति की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।संगम की क्षेत्रीय संयोजिका डॉ. पूजा कुमारी ने अपने संबोधन में कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता में वर्णित नारी की सात दिव्य शक्तियों कीर्ति, श्री, वाक्, स्मृति, मेधा, धृति एवं क्षमा—को केंद्र में रखकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में “सप्तशक्ति संगम” के अंतर्गत हजारों कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें करोड़ों महिलाओं की सहभागिता हुई है।
उन्होंने कहा कि इन आयोजनों का उद्देश्य भारतीय संस्कृति में नारी की गरिमा एवं उसके आध्यात्मिक स्वरूप को पुनः प्रतिष्ठित करना है। गीता के विभूति योग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने नारी में विद्यमान इन सात गुणों को अपनी दिव्य विभूतियां कहा है।
डॉ. पूजा ने कहा कि ‘कीर्ति’ समाज में सद्गुणों के प्रसार की प्रेरणा देती है, ‘श्री’ समृद्धि और सौंदर्य की प्रतीक है तथा ‘वाक्’ सत्य और मधुर संवाद की शक्ति प्रदान करती है। ‘स्मृति’ परंपरा और संस्कारों की संरक्षिका है, जबकि ‘मेधा’ विवेकपूर्ण नेतृत्व का आधार बनती है।
उन्होंने आगे कहा कि ‘धृति’ विपरीत परिस्थितियों में अडिग रहने की शक्ति देती है और ‘क्षमा’ समाज में समरसता व करुणा का वातावरण निर्मित करती है। इन सात शक्तियों का समन्वय ही सशक्त परिवार, संस्कारित समाज और सुदृढ़ राष्ट्र के निर्माण का आधार है।
कार्यक्रम का संचालन महावीरी विजयहाता की आचार्या प्रीति कुमारी ने किया, जबकि वृत कथन लोक शिक्षा समिति बिहार की उपाध्यक्ष प्रोफेसर रीता कुमारी ने प्रस्तुत किया।
अध्यक्षता महावीरी सरस्वती बालिका विद्या मंदिर की अध्यक्षा डॉ. ममता सिंह ने की। अतिथियों का परिचय बालिका विद्या मंदिर की प्रधानाचार्या सिम्मी कुमारी ने कराया तथा स्वागत महावीरी सरस्वती शिशु मंदिर, हकाम की प्रधानाचार्या सुमन कुमारी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सीवान विभाग संयोजिका आशा रंजन ने किया।समापन समारोह को सफल बनाने में विभाग निरीक्षक अनिल कुमार राम के नेतृत्व में शहर के सभी महावीरी विद्यालयों के प्रधानाचार्य, आचार्य, प्रबंध समिति के सदस्य एवं विद्यालय कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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हिन्दुस्थान समाचार / Amar Nath Sharma

