सोनवर्षा वैटलैंड का चारागाह विदेशी पक्षियों से हो रहा गुलजार

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सोनवर्षा वैटलैंड का चारागाह विदेशी पक्षियों से हो रहा गुलजार


सोनवर्षा वैटलैंड का चारागाह विदेशी पक्षियों से हो रहा गुलजार


भागलपुर, 05 मार्च (हि.स.)। बिहार में भागलपुर जिले के बिहपुर प्रखंड अन्तर्गत सोनवर्षा वैटलैंड का चारागाह इन दिनों विदेशी पक्षियों से गुलजार हो रहा है। जिसे देखने के लिए लोग यहां पहुंच रहे हैं। यहां दिनों दिन बार हेडे गूज (राजहंस) की संख्या में होने वाले वृद्धि को देखकर यह निश्चित हो गया है कि राजहंस को यह क्षेत्र चारागाह के रूप में बहुत रास आने लगा है।

यह एक प्रवासी पक्षी है। जो सर्दियों के मौसम में भारत आता है। पर्यावरणविद एवं जल पक्षी गणना, बिहार के कार्डिनेटर दीपक कुमार झुन्नू ने बताया कि है। अबतक की गणना में यह सर्वाधिक संख्या है। घटोरा झील का शांत वातावरण, आसपास के उपजाऊ कृषि भूमि, झील की पौष्टिक जलीय वनस्पतियां और इसका जलस्तर सामान्य होने कारण पक्षियों को सुलभता से भोजन उपलब्ध हो जाता है। जिस कारण यह झील अधिक संख्या में प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों को आकर्षित करता है। यह पक्षी मुख्यतः मध्य एशिया के देशों जैसे मंगोलिया, चीन (विशेषकर तिब्बत क्षेत्र) और कज़ाकिस्तान में प्रजनन करता है। जब वहां कड़ाके की ठंड और बर्फबारी शुरू होती है। तब यह पक्षी भोजन और अनुकूल जलवायु की तलाश में दक्षिण की ओर प्रवास करता है।

उन्होंने कहा कि भारत आने के लिए यह पक्षी दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला हिमालय को पार करता है। यह लगभग 25 से 30 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है। जो इसे विश्व के सबसे ऊंची उड़ान भरने वाले पक्षियों में शामिल करता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसके फेफड़े और रक्त में आक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता बहुत अधिक होती है। जिससे यह कम आक्सीजन वाले वातावरण में भी आसानी से उड़ सकता है। भारत में ये मुख्यतः उत्तर भारत के वैटलैंड क्षेत्रों, झीलों और नदियों के किनारे दिखाई देते हैं। मार्च-अप्रैल तक ये फिर से अपने मूल प्रजनन स्थलों की ओर लौट जाते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

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