विगत 54 वर्षों से अपने हाथ से मूर्ति बना करते हैं चैत्र नवरात्र पूजन : आनंदी दास

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विगत 54 वर्षों से अपने हाथ से मूर्ति बना करते हैं चैत्र नवरात्र पूजन : आनंदी दास


सहरसा, 26 मार्च (हि.स.)।शहरी क्षेत्र के गौतम नगर गंगजला वार्ड 15 में प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी चैती दूर्गा पूजा में मां दूर्गा सहित अन्य देवी देवताओं की प्रतिमा स्थापित की गयी।

महाअष्टमी के दिन गुरुवार से श्रद्धालुओं की भीड जुट रही है।महिला श्रद्धालुओं ने मां का खोइछा भरा। वहीं महानवमी को श्रद्धालुओं की भीड सुबह से ही उमडेगी। हालांकि चैती नवरात्रा की पूजा अर्चना लगभग सभी दूर्गा मंदिरों में की जाती है लेकिन शहरी क्षेत्र में दो जगहों पर प्रतिमा स्थापित की जाती है। गंगजला गौतम नगर निवासी आनंदी दास वर्ष 1972 से अपने दरवाजे खुद के हाथों मां दूर्गा एवं अन्य देवी देवताओं की मूर्ति बना पूजा अर्चना करते आ रहे हैं।मां के दर्शन एवं पूजा के लिए किसी प्रकार की बंदिस नहीं है। आनंदी दास ने बताया कि शुरुआत के दिनों में उनका परिवार काफी सुखी था लेकिन परिवार में आपसी वैमनस्यता के कारण अन्यान्य भाइयों द्वारा सब संपति हड़प कर उन्हें बेसहारा छोड़ दिया गया। लेकिन वे सबकुछ भगवान को सौंप कर किसी तरह गुजर बसर कर रहे थे।

भगवान के प्रति पूर्ण आस्था के साथ पूजा-पाठ करता रहा। इसी क्रम मे भगवती ने उन्हें साक्षात दर्शन देकर सुख समृद्धि का आशीर्वाद दिया एवं चैत महीने में प्रतिमा निर्माण की आज्ञा दी।उन्हें उन दिनों मूर्ति बनाने नहीं आती थी। कारीगरों का खुशामद किया लेकिन अत्यधिक रूपये मांगने पर वे देने में असमर्थ थे। जिसके बाद उन्हें खुद से मूर्ति निर्माण की प्रेरणा मिली। जिसके बाद उन्होंने मूर्ति निर्माण किया जिसमें सफल रहे।उसके बाद उनके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ।वही पुत्र पौत्र धन धान्य से परिपूर्ण होकर सपरिवार पूजा-पाठ मे संलग्न हैं।उन्होंने बताया कि अब तो मूर्ति निर्माण में उनके पुत्र ब्रजेश कुमार, चंद्रशेखर, बिजली मिस्त्री बंटी कुमार, संटी कुमार, सोनू,विनीत कुमार,अमित कुमार अंशु,राज लक्ष्मी एवं मुन्नी कुमारी द्वारा भी भरपूर सहयोग किया जाता है।

इस अवसर पर मां दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश, कार्तिक, राम, लक्ष्मण, सीता, बजरंगबली, ब्रह्मा, विष्णु, महेश के मूर्ति बनाते हैं।उन्होंने बताया कि वर्ष के चारों नवरात्रों में कलश स्थापना के साथ पूजा हवन अनुष्ठान का आयोजन कर कुमारी कन्या भोजन भी आयोजित किया जाता है। इसके साथ ही कार्तिक महीने में काली पूजा के दौरान काली प्रतिमा का निर्माण कर काली पूजा का आयोजन धूमधाम से किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस पूजा पाठ के दौरान वे किसी से भी किसी प्रकार का कोई चंदा या सहयोग नहीं लेते हैं बल्कि स्वयं खर्चे से ही पूजा का विशेष आयोजन किया जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / अजय कुमार

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