जोगबनी-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस समेत तीन ट्रेनें पुनः रद्द, बढ़ी परेशानी

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जोगबनी-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस समेत तीन ट्रेनें पुनः रद्द, बढ़ी परेशानी


अररिया 16 जून(हि.स.)।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के कटिहार-बारसोई रेलखंड पर चल रहे नॉन इंटरलॉकिंग कार्य का असर अब सीमांचल एवं भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र के लाखों रेल यात्रियों पर साफ दिखाई देने लगा है।

रेलवे द्वारा जोगबनी-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस समेत तीन ट्रेनें समेत कई महत्वपूर्ण ट्रेनों के परिचालन को पुनः अस्थायी रूप से रद्द एवं आंशिक रूप से निरस्त किए जाने से यात्रियों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।

रेलवे द्वारा जारी सूचना के अनुसार ट्रेन संख्या 75745/75746 कटिहार-जोगबनी-कटिहार डेमू का परिचालन 19 जून तक रद्द कर दिया गया है। वहीं 15723/15724 जोगबनी-सिलीगुड़ी-जोगबनी एक्सप्रेस 20 जून तक नहीं चलेगी। इसके अलावा 13159 कोलकाता-जोगबनी एक्सप्रेस को 17 जून तथा 13160 जोगबनी-कोलकाता एक्सप्रेस को 18 जून तक आंशिक रूप से रद्द किया गया है।

रेलवे के अनुसार नॉन इंटरलॉकिंग कार्य के कारण एनएफ रेलवे के कुल 16 ट्रेनों का मार्ग परिवर्तन किया गया है, 4 ट्रेनों को पूर्ण रूप से रद्द किया गया है तथा कई अन्य ट्रेनों के परिचालन में बदलाव किया गया है। इसका सीधा प्रभाव सीमांचल क्षेत्र की रेल यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा है।

सबसे अधिक परेशानी जोगबनी-सिलीगुड़ी इंटरसिटी एक्सप्रेस के बंद होने से हो रही है। यह ट्रेन सीमांचल को उत्तर बंगाल से जोड़ने वाली जीवनरेखा मानी जाती है।

प्रतिदिन हजारों व्यवसायी, छात्र, मरीज, पर्यटक एवं नौकरीपेशा लोग इसी ट्रेन से सिलीगुड़ी आते-जाते हैं। वहीं जोगबनी-कोलकाता एक्सप्रेस के प्रभावित होने से कोलकाता जाने वाले यात्रियों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। सीमांचल के साथ-साथ नेपाल के विराटनगर एवं आसपास के क्षेत्रों के यात्री भी इस रेल सेवा पर काफी हद तक निर्भर रहते हैं।

यात्रियों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव राकेश रौशन, मंडल रेल उपभोक्ता परामर्शदात्री समिति के सदस्य बच्छराज राखेचा, रेल यात्री संघ के चंदन भगत, सिविल सोसायटी के मांगी लाल गोलछा तथा रेल संघर्ष समिति के पवन मिश्रा ने रेल प्रशासन से शीघ्र वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि सीमांचल की जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जोगबनी-कोलकाता एक्सप्रेस का दैनिक परिचालन सुनिश्चित किया जाए।

साथ ही कटिहार रेल मंडल को ईएमयू रैक उपलब्ध होने तक वैकल्पिक व्यवस्था के तहत आईसीएफ रैक से कम से कम दो जोड़ी अतिरिक्त ट्रेनों का परिचालन कराया जाए। इससे यात्रियों की भीड़ पर नियंत्रण होगा, लोगों को राहत मिलेगी तथा रेलवे के राजस्व में भी वृद्धि होगी।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार ठाकुर

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