दियारा के बाद अब पॉश कॉलोनियों और महादलित बस्तियों में घुसा बाढ़ का पानी, बेबसी के बीच जी रहे लोग
भागलपुर, 08 सितंबर (हि.स.)।
जिले में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने अब बेहद विकराल रूप धारण कर लिया है। पिछले कई दिनों से दियारा और निचले इलाकों को टापू बनाने के बाद, बाढ़ का पानी अब शहर के रिहायशी और पॉश इलाकों में भी तेजी से प्रवेश कर गया है।
शहरी क्षेत्र में अचानक बढ़े जलस्तर के कारण चारों तरफ दहशत का माहौल है और लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। शहर के पॉश इलाकों में शुमार बैंक कॉलोनी में बाढ़ की स्थिति बेहद भयावह हो चुकी है। यहाँ पक्के मकानों के भीतर 4 से 5 फीट तक पानी जमा हो गया है।
हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि कई घरों के बेडरूम तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है, जिससे घरों में रखा कीमती फर्नीचर और जरूरी सामान पूरी तरह डूब कर बर्बाद हो गया है। इस अप्रत्याशित संकट के कारण स्थानीय निवासियों के सामने अपना घर छोड़कर किसी सुरक्षित स्थान पर शरण लेने की मजबूरी आन पड़ी है।
दूसरी तरफ, भागलपुर नगर निगम के वार्ड संख्या 21 स्थित दीपनगर महादलित बस्ती में भी गंगा का पानी लगातार पैर पसार रहा है। यहाँ लोगों के आशियाने तीन से चार फीट पानी में डूबे हुए हैं। बस्ती के लोग इस दूषित पानी के बीच ही किसी तरह जीवन यापन करने को मजबूर हैं।
पीड़ितों का दर्द है कि इस उग्र रूप धारण कर चुकी आपदा के समय वे दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं। बाढ़ के पानी के साथ लगातार आ रहे जहरीले कीड़े-मकोड़ों का डर उन्हें चौबीसों घंटे सता रहा है। बाढ़ की इस विभीषिका की मार सबसे ज्यादा बच्चों की शिक्षा पर पड़ रही है। दीपनगर के छात्र प्रेम ने बताया, बाढ़ के कारण हमारी पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो गई है।
गलियों और रास्तों में पानी भरे होने के कारण स्कूल और ट्यूशन जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों का भविष्य पानी में डूबता नजर आ रहा है, लेकिन इसका समाधान फिलहाल किसी के पास नहीं है। इस भीषण संकट के बीच बाढ़ पीड़ितों में जिला प्रशासन और अपने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
प्रभावित लोगों का साफ तौर पर कहना है कि संकट की इस घड़ी में ना तो जिला प्रशासन का कोई अधिकारी और ना ही कोई जनप्रतिनिधि उनकी सुध लेने के लिए अब तक पहुंचा है। लोगों ने सरकार और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि उन्हें अविलंब राहत सामग्री, भोजन और सुरक्षित आश्रय मुहैया कराया जाए ताकि वे इस आपदा का सामना कर सकें।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

