नाथनगर के कई गांवों में घुसा बाढ़ का पानी, ऊंचे स्थानों पर शरण ले रहे लोग
भागलपुर, 03 सितंबर (हि.स.)। जिले में गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी से बाढ़ की स्थिति भयावह होती जा रही है। गंगा के तटीय और निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल रहा है, जिससे कई इलाके पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। नाथनगर प्रखंड के रत्तीपुर, बैरिया, शंकरपुर, अजमेरीपुर, रसीदपुर और श्रीरामपुर समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी घुसने से हाहाकार मचा हुआ है। हालात बिगड़ने के बाद ग्रामीण अपने परिवार, मवेशियों और जरूरी सामान के साथ सुरक्षित व ऊंचे स्थानों पर पलायन करने को मजबूर हैं।
बाढ़ की इस विभीषिका से इन इलाकों की करीब 5 हजार की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश और गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण उन्हें यह त्रासदी झेलनी पड़ती है, लेकिन इस बार हालात और ज्यादा बिगड़ रहे हैं। प्रभावित इलाकों के कई परिवार अपना घर-बार छोड़कर रविंद्र भवन, टिल्लाह कोठी और अन्य ऊंचे सरकारी व निजी स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। बाढ़ पीड़ितों की परेशानी सिर्फ पानी के घेराव तक सीमित नहीं है। एक तरफ बाढ़ का पानी और दूसरी तरफ लगातार हो रही बारिश ने लोगों की मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं।
खुले या अस्थायी ठिकानों (तंबू) पर रह रहे परिवारों के लिए खाना बनाना और रात गुजारना बेहद मुश्किल हो गया है। पीड़ितों ने बताया कि बारिश के कारण चूल्हा तक नहीं जल पा रहा है, जिससे वे सूखा राशन (चूड़ा-गुड़) खाकर दिन काटने को विवश हैं। बाढ़ के कारण जलावन की भारी किल्लत हो गई है। इसके साथ ही पशुओं के चारे का संकट भी गहराने लगा है। ग्रामीण महिलाएं किसी तरह जान जोखिम में डालकर आसपास के पानी भरे इलाकों से चारा जुटाकर पशुओं को बचा रही हैं। इसके अलावा, बाढ़ के पानी के साथ सांप और अन्य जहरीले जीवों का खतरा भी काफी बढ़ गया है, जिससे लोग रात भर दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। त्राहिमाम कर रहे ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर रहने की व्यवस्था, तैयार भोजन, जलावन, पशु चारा, तिरपाल और मेडिकल किट जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। फिलहाल, लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच ग्रामीण खौफ में हैं और पानी कम होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

