बाढ़ घोषित करने और फसल क्षति मुआवजे समेत आठ सूत्री मांगों को लेकर कोसी बाढ़ पीड़ितों का जल सत्याग्रह

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बाढ़ घोषित करने और फसल क्षति मुआवजे समेत आठ सूत्री मांगों को लेकर कोसी बाढ़ पीड़ितों का जल सत्याग्रह


बाढ़ घोषित करने और फसल क्षति मुआवजे समेत आठ सूत्री मांगों को लेकर कोसी बाढ़ पीड़ितों का जल सत्याग्रह


सुपौल, 22 सितंबर (हि.स.)। कोसी तटबंध के भीतर बाढ़ और जलजमाव की समस्या को लेकर मंगलवार को मरौना अंचल के एकडेरा पलार घाट पर कोसी बाढ़ पीड़ितों का एक दिवसीय जल सत्याग्रह आयोजित किया गया। कोसी नव निर्माण मंच के आह्वान पर आयोजित सत्याग्रह में मरौना एवं किशनपुर अंचल के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में महिला-पुरुष शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों ने पानी में खड़े होकर अपनी समस्याएं रखीं और जिला प्रशासन से क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित घोषित कर राहत एवं पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग की। जल सत्याग्रह में मरौना अंचल की सिसौनी पंचायत के एकडेरा, जोबहां, सिसौनी पलार तथा किशनपुर अंचल के बैराहा पंचायत के बौराहा, गोढ़ियारी, मानिकपुर, बुर्जा मुसहरी, नोआबाखर पंचायत के परसाही, सिमराहा सहित अन्य गांवों के बाढ़ पीड़ित पहुंचे। ग्रामीणों ने कहा कि मानसून शुरू होने के बाद से ही तटबंध के भीतर स्थित गांवों में पानी जमा है। घर, आंगन, रास्ते और खेत पानी से घिरे हुए हैं। एक घर से दूसरे घर तक जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि जलजमाव से महिला, बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोगों को काफी परेशानी हो रही है। लंबे समय से पानी में रहने के कारण पशुओं के भी बीमार होने की समस्या सामने आ रही है। वहीं, खेतों में लगी फसल पूरी तरह बर्बाद होने का दावा ग्रामीणों ने किया। ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन को तटबंध के भीतर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का जायजा लेना चाहिए।

सत्याग्रह के दौरान ग्रामीणों ने बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि चार-पांच दिनों तक किसी मोहल्ले, टोले या गांव के चारों ओर नदी का पानी रहने और आवागमन का रास्ता बाधित होने की स्थिति में सामान्य जनजीवन प्रभावित होता है। ग्रामीणों का आरोप था कि इसके बावजूद क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित घोषित कर राहत उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।

जल सत्याग्रह के दौरान प्रदर्शनकारियों ने जिले को बाढ़ प्रभावित घोषित कर मानक संचालन प्रक्रिया एवं निर्धारित मानदंड के अनुसार जीआर की राशि उपलब्ध कराने, फसल क्षति के लिए इनपुट अनुदान देने, भूमिहीन एवं पुनर्वास की आवश्यकता वाले परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाने, तटबंध के भीतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और मेडिकल व पशु चिकित्सा के नि:शुल्क शिविर लगाने की मांग की।

इसके अलावा कोसी पीड़ित विकास प्राधिकार को पुनर्जीवित करने की दिशा में पहल करने तथा कोसी की छाड़न धाराओं को पुनर्जीवित कर बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कार्य करने की मांग भी उठाई गई। ग्रामीणों ने कहा कि लगातार जलजमाव के कारण उनका जनजीवन प्रभावित है और उनकी समस्याओं का समाधान प्रशासनिक स्तर पर प्राथमिकता से किया जाना चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

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