पानी घटने की रफ्तार धीमी, कर्ज के दलदल में डूबे दियारा के किसान

WhatsApp Channel Join Now
पानी घटने की रफ्तार धीमी, कर्ज के दलदल में डूबे दियारा के किसान


पानी घटने की रफ्तार धीमी, कर्ज के दलदल में डूबे दियारा के किसान


भागलपुर, 16 सितंबर (हि.स.)।

जिले के बाढ़ प्रभावित प्रखंडों में स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। बाढ़ का पानी तो स्थिर हुआ है, लेकिन इसके घटने की रफ्तार बेहद धीमी है।

इसके कारण प्रभावित इलाकों में जनजीवन पूरी तरह ठप है और लोगों के आवागमन का एकमात्र साधन नाव ही बचा है।

हर तरफ पानी फैले होने से दियारा क्षेत्र के किसानों के सामने भुखमरी और आर्थिक तबाही का संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ की विभीषिका ने खेतों में खड़ी फसलों को पूरी तरह तबाह कर दिया है।

प्रभावित किसानों के अनुसार, इस साल आई बाढ़ ने मक्का, धान, मिर्च और मौसमी सब्जियों को भारी नुकसान पहुँचाया है। केवल पीरपैंती प्रखंड की 18 पंचायतों में ही लगभग 56 सौ हेक्टेयर में लगी फसल पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ चुकी है।

मोहनपुर मधुबन के किसान इन्द्रदेव मंडल और बाखरपुर के चरितर मंडल ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, बाढ़ ने हमारी मेहनत पर पानी फेर दिया है।

मक्का और मिर्च की फसलें सड़ चुकी हैं। अब परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया है। दियारा क्षेत्र में खेती करना हर साल जुआ खेलने जैसा हो गया है। स्थानीय किसान वरुण यादव, गांधी तिवारी, प्रदीप सिंह, विनोद पांडे और कुंदन यादव ने बताया कि यहाँ के अधिकांश किसान हर साल किसान क्रेडिट कार्ड और महाजनों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेकर खेती करते हैं।

किसानों ने दर्द बयां करते हुए कहा, हर साल बाढ़ की विभीषिका हमें कर्ज के दलदल में धकेल देती है। इस बार तो फसल पूरी तरह नष्ट होने के कारण खेत की जोताई, खाद और मजदूरों की मजदूरी तक की कीमत चुकता कर पाना नामुमकिन हो गया है। बाढ़ ने सबसे गहरा जख्म उन गरीब किसानों को दिया है जो बटाईदारी पर जमीन लेकर खेती करते हैं।

बटाईदारों को न केवल जमीन मालिक को तय हिस्सा या रकम देनी होती है, बल्कि पूरी लागत भी खुद लगानी पड़ती है। फसल डूबने के बाद अब उनके पास न तो खाने के लिए अनाज बचा है और न ही अगली फसल की बुआई के लिए पूंजी। जिले के विभिन्न प्रभावित प्रखंडों के किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन से अविलंब फसलों के नुकसान का उचित आकलन कराने की मांग की है।

किसानों का कहना है कि उन्हें ऋण माफी, उचित मुआवजा और अगली फसल के लिए मुफ्त बीज व खाद दिए जाएं, ताकि वे इस भारी आर्थिक संकट से उबर सकें।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

Share this story