राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश मित्तल का निधन, साहित्य जगत में शोक की लहर

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राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश मित्तल का निधन, साहित्य जगत में शोक की लहर


सुपौल, 04 सितंबर (हि.स.)। राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मार्गदर्शक जगदीश मित्तल का 03 सितंबर को निधन हो गया। वे पिछले चार दिनों से दिल्ली के एक अस्पताल में किडनी एवं लीवर में संक्रमण के कारण वेंटिलेटर पर थे। उनके निधन की खबर से साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

जगदीश मित्तल के निधन को राष्ट्रीय कवि संगम सहित हिंदी साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय कवि संगम को देशभर में विस्तार देने और संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में साहित्यकार और कवि संस्था से जुड़े तथा राष्ट्रीय कवि संगम ने साहित्यिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। जगदीश मित्तल साहित्य और कविता को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं मानते थे, बल्कि इसके जरिए समाज में राष्ट्रभाव, संस्कार और भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता पैदा करने के पक्षधर थे। उन्होंने साहित्य को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किया। नई पीढ़ी को साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रहित से जोड़ने की दिशा में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।

साहित्य के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों के प्रति भी वे सदैव सक्रिय रहे। उनका सरल एवं सहज व्यक्तित्व, साहित्य के प्रति समर्पण और संगठन के सभी सदस्यों को साथ लेकर चलने की क्षमता उन्हें अपने साथियों एवं साहित्यकारों के बीच विशेष रूप से सम्मानित बनाती थी। उनके निधन पर राष्ट्रीय कवि संगम से जुड़े रवि भूषण माहेश्वरी, नलिन जायसवाल, अरविन्द ठाकुर, विमलानंद झा, निर्भय निर्वाण, अल्का वर्मा, बिन्दु श्रीवास्तव, कल्याणी स्वरूपा, आनंद भारती, मोहन प्रशांत, सृष्टि मिश्रा, साक्षी मिश्रा, जया सिंह सहित विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े देश-विदेश के लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया। शोक व्यक्त करते हुए लोगों ने कहा कि जगदीश मित्तल जी का साहित्य और समाज के प्रति योगदान सदैव स्मरण किया जाता रहेगा। उन्होंने अपने कार्यों और विचारों के माध्यम से साहित्यकारों की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया। उनका निधन साहित्य जगत के लिए एक ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई कठिन है।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

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